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केंद्र की सरकार गिराने जेल आया था अतीक अहमद, मुलायम सिंह यादव की भी नहीं मानी थी बात

साल 2008। जुलाई की उमसभरी गर्मी। दिल्ली के लुटियन जोन्स में सियासी पारा चढ़ा था। केंद्र कांग्रेस की सरकार थी। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। मनमोहन की सरकार पर खतरा था।

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लखनऊ

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Upendra Singh

Apr 16, 2023

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साल 2009 में चुनाव था। लोकसभा चुनाव से एक साल पहले लेफ्ट पार्टियों ने मनमोहन सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। अमेरिका से परमाणु डील पर लेफ्ट पार्टियां नाराज थीं।


मनमोहन सिंह सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
22 जुलाई, साल 2008। लोकसभा में मनमोहन सिंह सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हो रही थी। अतीक अहमद मैनपुरी जेल में बंद था। इलाहाबाद की कोर्ट ने संसद के दो दिवसीय विशेष सत्र में हिस्सा लेने और वोटिंग करने के लिए अतीक अहमद को इजाजत दे दी थी।

स्पेशल जज एमपी यादव ने तब जेल अधिकारियों को आदेश द‌िए। कड़ी सुरक्षा में अतीक अहमद को दिल्ली ले जाया जाए। दो दिन तक वहां रखने का आदेश दिया था। उस वक्त अतीक अहमद फूलपुर से सपा के सांसद थे। कई आपराधिक मामलों में ट्रायल का सामना कर रहे थे।


मुलायम की मर्जी के खिलाफ अतीक अहमद
मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी मनमोहन सिंह सरकार को समर्थन था। न्यूक्लियर डील पर भी मनमोहन सिंह के साथ थे। तब उसके 39 सांसदों में से छह सांसदों ने सरकार के खिलाफ अपना वोट डाला था। सरकार के खिलाफ वोटिंग करने वालों में चार बागी सांसद मुनव्वर हसन, एसपी सिंह बघेल, राजनारायण बुधोलिया और जयप्रकाश रावत। जेल में बंद दो सांसद अतीक अहमद और सांसद अफजल अंसारी शामिल थे।

अतीक अहमद के लिए चाचा-भतीजे में ठन गई थी
सपा ने दो निर्दलीय सांसदों को मनाया। मनमोहन सरकार को समर्थन दिलाकर सरकार गिरने से बचा ली थी। ये दो सांसद थे। बालेश्वर यादव और बृज भूषण शरण सिंह। प्रतिद्वंद्वी बसपा के सभी 17 सांसदों ने सरकार के खिलाफ वोट किया था।


सपा से बाहर निकाल दिया था
सपा ने अतीक को जनवरी 2008 में पार्टी से बाहर निकाल दिया गया था। अतीक बहुजन समाज पार्टी यानी BSP के साथ दोस्ती करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।


मनमोहन सरकार ने जीता था विश्वास मत
543 सदस्यों वाली लोकसभा में मनमोहन सिंह सरकार के पक्ष में 275 मत मिले थे। विरोध में सिर्फ 256 वोट ही मिल सके थे। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस तब वोटिंग में शामिल नहीं हुई थी। खुद को उससे अलग कर लिया था। दूसरी तरफ बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के आठ सांसदों ने भी अपने-अपने दलों के रुख का उल्लंघन किया था और वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था।


मुलायम से बिगड़ते चले गए रिश्ते
अतीक का सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से संबंध बिगड़ने लगे। अतीक ने मुलायम सिंह यादव के मतदान से दूर रहे। नो ट्रस्ट वोटिंग में भाग लिया। सरकार के खिलाफ वोट दिया था। उस समय अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ भी कई अनर्गल बयान दिए थे।