24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

प्रिया पाल के भोजपुरी गीतों संग कविताओं के रस से तर-बतर हुए श्रोता

गणमान्य व्यक्तियों के अलावा तमाम दर्शक उपस्थित थे।

2 min read
Google source verification

लखनऊ

image

Ritesh Singh

Feb 14, 2021

 गणमान्य व्यक्तियों के अलावा तमाम दर्शक उपस्थित थे।

गणमान्य व्यक्तियों के अलावा तमाम दर्शक उपस्थित थे।

लखनऊ, प्रगति पर्यावरण संरक्षण ट्रस्ट के तत्वावधान में कथा मैदान आशियाना लखनऊ में चल रहे अवध महोत्सव-2021 की दसवीं सांस्कृतिक संध्या में प्रिया पाल के भोजपुरी गीतों संग कविताओं के रस से श्रोता तर-बतर हुए। इस अवसर पर प्रगति पर्यावरण संरक्षण के अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह और उपाध्यक्ष एन बी सिंह ने आज की दसवीं सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर पवन पाल, अनुराग शाह सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों के अलावा तमाम दर्शक उपस्थित थे।

आज की सांस्कृतक संध्या का आरम्भ प्रसिद्ध भोजपुरी गायिका प्रिया पाल ने अपनी खनकती हुई आवाज में देवीगीत नीमिया के डार मईया लगेली झूलवा से कर श्रोताओं को भगवती देवी दुर्गा के नवों रूपों के दर्शन करवाये। इस प्रस्तुति के उपरान्त प्रिया पाल ने अपनी सुमधुर आवाज में राम लखन दोनों भइया अवध रहइया चारों भईयन की आरती उतारो को सुनाकर श्रोताओं को भगवान श्रीराम की भक्ति के सागर में आकण्ठ डुबोया।

भक्ति भावना से ओतप्रोत इस प्रस्तुति के उपरान्त प्रिया पाल ने अपनी खनकती हुई आवाज में रेलिया बैरन पिया को लिए जाये रे को सुनाया तो श्रोता झूमकर नाच उठे। इसी क्रम में प्रिया ने जुग जुग जियत ललनवा और सरौता कहां भूल आए मोरे ननदोइया जैसे अन्य भोजपुरी गीतों को सुनाकर श्रोताओं को अपने साथ खुब झुमाया नचाया। प्रिया पाल के गाए इन भोजपुरी गीतों पर दीपिका राय के निर्देशन में प्रेक्षा सिद्धार्थ, श्रुति कौशल, प्रत्युशा सिद्र्धाथ ने सम्मोहक नृत्य प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रिया पाल ने पुलवामा अटैक में मारे गए अमर शहीदों को भोजपुरी गीतों के जरिए श्रद्धांजलि भी दी। कार्यक्रम का संचालन सम्पूर्ण शुक्ला और अरविन्द सक्सेना ने किया।

इस अवसर पर पी के फैमिला संस्था द्वारा के के अग्निहोत्री की अध्यक्षता, हरि बहाुदर सिंह के मंच संचालन और प्रीति पाण्डेय की वाणी वंदना से आरम्भ हुए कवि सम्मेलन में डाॅ अंजना कुमार ने कहा मेरी निगाहों से जाने कितने सफर गुजर गये, कुछ निगाह से चढे कुछ नजरों से उतर गये। सुबोध सुलभ ने सुनाया जननी जन्म भूमि होती स्वर्ग से महान बंधु इसलिए राम जन्मभूमि का सवाल है। रंजीत शर्मा ने कहा मैने जिसको जाना जिसको चाहा वो खुदा सा मगऊर हो गया, मुझको दे के कसम खुदा को खुदा भी उसका हम सफर हो गया। इसी क्रम में प्रीति पाण्डेय ने सुनाया मन गढ सी हूं अनगढ सई नदी का नीर हूं, उन्मत्त सी हूं ना लकीर की फकीर हूं, जो गढ़ रहा प्रताप का अध्यात्म कला का, मंदिर में शारदे की प्रीति बेनजीर हूं। हरि बहाुदुर ने कहा कलम जब भी उठी है वीरों का गुणगान लिखती है, सदा ही नेक नियत मान व ईमान लिखती है।

संदीप सुरला की पंक्तियां थी अपनी आंखों का कजरा बना लो मुझे, अपनी साड़ी का अंचरा बना लो मुझे। इस अवसर पर अनन्त अनुनाद साहित्यिक मंच द्वारा भी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें घनानन्द पाण्डेय मेघ, सुनील कुमार बाजपेई, हौसला प्रसाद त्रिपाठी, रूपा पाण्डेय, रंजना गुप्ता, मृगांक श्रीवास्तव, राजा भइया, गौरी शंकर वैश्य, प्रतिम गुप्ता सहित अन्य कवियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।