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सपा मुखिया अखिलेश की एक और ‘गलती’

उत्तर प्रदेश की सीतापुर जेल में 27 महीने गुजारने के बाद सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान शुक्रवार को जमानत पर रिहा हो गए. सीतापुर जेल से बाहर निकले ही आजम खान के दोनों बेटों और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के मुखिया शिवपाल सिंह यादव तथा सपा के तमाम समर्थकों ने उनका स्‍वागत किया. लेकिन समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव तथा पार्टी के अन्य बड़े नेता इस मौके पर नदारत रहे.

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लखनऊ

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Dinesh Mishra

May 20, 2022

File Photo of Akhilesh Yadav

File Photo of Akhilesh Yadav

अखिलेश यादव ने ट्वीट कर आजम की रिहाई का स्वागत किया, जबकि शिवपाल सिंह यादव ने आजम खान के जेल से बाहर आते ही उनके कंधे पर हाथ रखकर उन्हें हौसला बंधाया. यह संकेत भी किया कि आजम खान के हर सुख दुःख में वह (शिवपाल) उनके साथ है. सपा मुखिया अखिलेश यादव ऐसा ही संदेश वहां पहुंच कर दे सकते थे लेकिन वह मौका चूक गए. उनसे एक और गलती हो गई. इसका खामियाजा उन्हें उठाना पड़ सकता है.

ऐसी ही गलती वह बीते आठ वर्षो से लगातार करते ही आ रहे हैं. सपा नेताओं के अनुसार वर्ष 2014 से हर महत्वपूर्ण अवसर पर अखिलेश यादव ऐसी गलती करते रहे हैं. जिसके चलते वर्ष 2016 में शिवपाल सिंह यादव से उनका पहला बड़ा राजनीतिक विवाद हुआ. इस विवाद में मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश का साथ दिया और अखिलेश यादव सपा के मुखिया बन गए, लेकिन इस परिवारिक विवाद का असर वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला. कांग्रेस के गठबंधन करने के बाद भी अखिलेश यादव विधानसभा चुनाव हारे गए. इसके बाद उन्होंने लोकसभा चुनाव में मायावती के साथ गठबंधन किया, यह चुनाव भी वह हारे. बीते विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने छोटे दलों को जोड़कर चुनाव लड़ा पर वह सत्ता के करीब भी नहीं पहुंच सके. इस चुनावी हार के बाद सपा मुखिया ने शिवपाल सिंह यादव और आजम खान जैसे सीनियर नेताओं की अनदेखी करना शुरू किया. परिणाम स्वरूप शिवपाल ने अखिलेश यादव से दूरी बनाकर प्रसपा को मजबूत करने में जुट गए. इसी क्रम में वह पिछले माह जेल में आजम खान से मिलने गए. लेकिन अखिलेश यादव ने तब भी आजम खान से मिलना जरूरी नहीं समझा. जबकि मात्र दो घंटे का सफर कर वह लखनऊ से सीतापुर जेल में आजम खान से मिलने पहुंच सकते थे.

सपा मुखिया के इस रुख से सीनियर मुस्लिम नेता भी खफा हुए पर अखिलेश यादव ने आजम खान के मामले में चुप्पी ही बनाए रखी. शुक्रवार को भी जब आजम खान जेल से बाहर आए और शिवपाल सिंह के साथ उनकी फोटों मीडिया में चलते लगी तब अखिलेश यादव ने ट्वीट कर आजम का स्वागत किया. अखिलेश ने ट्वीट कर कहा कि सपा के वरिष्ठ नेता और विधायक आजम खान के जमानत पर रिहा होने पर उनका हार्दिक स्वागत है. जमानत के इस फैसले से सर्वोच्च न्यायालय ने न्याय को नए मानक दिए हैं. पूरा ऐतबार है कि वो अन्य सभी झूठे मामलों-मुकदमों में बाइज्जत बरी होंगे. झूठ के लम्हे होते हैं, सदियां नहीं! अखिलेश यादव के इस ट्वीट से आजम खान की नाराजगी कम होगी. यह सवाल सपा के नेताओं के जहन में हैं. अधिकांश सपा नेताओं का मत है कि आजम खान अब सपा और अखिलेश से किनारा कर सकते हैं. क्योंकि आजम खान भी यह मान चुके हैं कि सपा के लिए खून-पसीना बहाने के बाद भी उनकी रिहाई के लिए अखिलेश यादव ने कोई प्रयास नहीं किया.

अब देखना यह है कि आजम खान सपा में रहते हुए अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे या फिर शिवपाल सिंह यादव के साथ मिलकर एक नई शुरुआत करेंगे. इसी माह आजम खान के अगले कदम का खुलासा हो जाएगा. आजम खान जेल से ऐसे समय बाहर आए हैं जब सूबे में विधानसभा सत्र शुरू होने वाला है. 23 मई से उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र शुरू होकर 31 मई तक चलेगा. और सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का पहला बजट 26 मई को पेश करेगी. इस विधानसभा सत्र के ठीक पहले 21 मई को अखिलेश यादव ने पार्टी के सभी विधायकों की मीटिंग बुलाई है. आजम खान इस बैठक में आते हैं या नहीं. इससे उनके अगले फैसला का पता चलेगा. आजम खान की सियासी ताकत से सभी वाकिफ हैं. उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं. ना सिर्फ रामपुर बल्कि पूरे प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय के वोटर्स पर आजम की मजबूत पकड़ है.

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मुस्लिमों के बीच सपा के सियासी आधार बढ़ाने में आजम खान की अहम भूमिका रही है. यही वजह है कि शिवपाल यादव से लेकर कांग्रेस और बसपा तक आजम खान को अपने साथ लाने में जुटी है. यह सब जानने के बाद भी अखिलेश यादव ने आजम खान के जेल से बाहर आने पर उनके मिलने की जरूरत नहीं समझी, उनकी इस गलती का खामियाजा उन्हें आजम खान को खोकर उठाना पड़ सकता है. ऐसा सपा के तमाम नेताओं का कहना है.

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