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योगी सरकार का बाबरी मस्जिद पर अब तक का सबसे बड़ा फैसला, वक्फ बोर्ड के राजस्व अभिलेख से डिलीट होगी बाबरी मस्जिद

वक्फ बोर्ड के राजस्व अभिलेख में 26-फैजाबाद’ नाम से दर्ज है ‘‘बाबरी मस्जिद’

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लखनऊ

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Neeraj Patel

Nov 13, 2019

योगी सरकार का बाबरी मस्जिद पर अब तक का सबसे बड़ा फैसला, वक्फ बोर्ड के राजस्व अभिलेख से...

योगी सरकार का बाबरी मस्जिद पर अब तक का सबसे बड़ा फैसला, वक्फ बोर्ड के राजस्व अभिलेख से...

लखनऊ. सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बाबरी मस्जिद पर अब तक का सबसे बड़ा फैसला लिया है। योगी सरकार ने अब यूपी सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड में 26-फैजाबाद’ नाम से दर्ज वक्फ सम्पत्ति ‘‘बाबरी मस्जिद’ को जल्द ही वक्फ बोर्ड के राजस्व अभिलेख से डिलीट करने का फैसला किया है। बता दें कि वक्फ बोर्ड के राजस्व अभिलेख में 26-फैजाबाद’ नाम से ‘‘बाबरी मस्जिद’ दर्ज है। जिसे अब हमेशा के लिए डिलीट कर दिया जाएगा।

इस सम्बन्ध में बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कापी अपने विधि विशेषज्ञों को अध्ययन के लिए भेज दी है। कानून विशेषज्ञों की राय आने के बाद बोर्ड सबसे पहला काम ‘‘26-फैजाबाद’ को अपने अभिलेख (खाते) से डिलीट कर इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को देगा। इसके साथ ही बोर्ड वक्फ ‘‘26-फैजाबाद’ को डिलीट करने के बाद उसका प्रमाण-पत्र दिल्ली में केन्द्र सरकार और उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार को देगा। जिसके बाद वक्फ बोर्ड के राजस्व अभिलेख से बाबरी मस्जिद का नाम हमेशा के लिए मिट जाएगा।

बाबरी मस्जिद वर्ष 1944 में तत्कालीन सरकार के वक्फ सव्रे कमिश्नर ने सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड में दर्ज कराई थी। इस वक्फ सम्पत्ति का नम्बर ‘‘26-फैजाबाद’ है। वर्ष 1945 में उत्तर प्रदेश शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड ने कोर्ट में दावा किया था कि ‘‘26-फैजाबाद’ शिया वक्फ सम्पत्ति है, लेकिन वर्ष 1946 में शिया वक्फ बोर्ड मुकदमा हार गया था। इसके बाद वर्ष 2017 में शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड ने वर्ष 1946 के फैसले का हवाला देकर पुन: एक याचिका दायर की थी लेकिन अदालत में कहा था कि पुन: अपील करने में 24964 दिनों की देरी हुई है और देरी का उचित कारण नहीं बताया गया है।

वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारूकी ने ‘‘राष्ट्रीय सहारा’ को विशेष भेंट में बताया कि मीडिएशन कमेटी में कोई हल न निकलने के बाद से सुन्नी वक्फ बोर्ड कहता आ रहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरा सम्मान करेगा। बोर्ड आज भी अपने उसी कमिटमेंट पर कायम है। इसीलिए सुन्नी वक्फ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कोई रिव्यू पिटीशन दाखिल नहीं कर रहा है।