इस बार इस मास में 5 मंगलवार पड़ेगा। जोकि 17 मई को, 24 मई को, 31 मई को, 7 जून को और 14 जून को हैं।
ज्येष्ठ माह की शुरुआत के साथ ही आज यानी मुगलवार से बड़ा मंगल की शुरुआत भी हो गई है। ज्येष्ठ माह 17 मई से लेकर 14 जून तक है, इसमें 05 बड़ा मंगल आने वाले हैं। बड़े मंगलवार के दिन पवनपुत्र हनुमान की पूजा-अर्चना की जाती है। हालांकि ज्येष्ठ माह के मंगलवार को बड़ा मंगल क्यों कहते हैं इसके पीछे भी कई मान्यताएं हैं। वहीं उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बड़ा मंगल विशेष रूप से मनाया जाता है। इसे बुढ़वा मंगल भी कहा जाता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले बड़े मंगल पर विधि विधान से हनुमानजी की पूज करने से भक्तों को प्रत्येक कष्ट और बाधा से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के महत्व के बारे में...
बुढ़वा मंगल कब?
आज 17 मई को ज्येष्ठ मास का पहला मंगलवार है। इस बार इस मास में 5 मंगलवार पड़ेगा। जोकि 17 मई को, 24 मई को, 31 मई को, 7 जून को और 14 जून को हैं।
बड़ा मंगल को क्यों कहते है बुढ़वा मंगल
बड़ा मंगल को बुढ़वा मंगल कहने के पीछे दो पौराणिक कथा प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार महाभारत काल में जब भीम को अपने बल का बड़ा घमंड हो गया था, तो हनुमान जी ने बूढ़े वानर का रूप रखकर भीम के घमंड को मंगलवार को तोड़ा था। दूसरी कथा के अनुसार वन में विचरण करते हुए भगवान श्री राम जी से हनुमान जी का मिलन विप्र (पुरोहित) के रूप में इसी दिन हुआ था। इसलिए ज्येष्ठ मास के मंगलवार को बुढ़वा मंगल या बड़ा मंगल के नाम से जाना जाता है।
लखनऊ में क्यों मनाते हैं बड़ा मंगल?
लखनऊ में बड़ा मंगल से जुड़ी मान्यता है कि एक व्यापारी ने हनुमान जी के समक्ष मन्नत मांगी थी कि उसका केसर एवं इत्र बिक जाएगा, तो वह उनके भव्य मंदिर का निर्माण कराएगा। नवाब वाजिद अली शाह ने उसका सारा इत्र और केसर खरीद लिया। मन्नत पूरी होने पर उस व्यापारी ने हनुमान जी का भव्य मंदिर बनवाया। तब से ही लखनऊ में हर साल ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगलवार को बड़ा मंगल मनाया जाता है।
बड़ा मंगल पर हनुमान पूजा
बड़ा मंगल के अवसर पर लखनऊ के सभी हनुमान मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की जाती है। भंडारे का आयोजन किया जाता है। रात्रि के समय में जागरण भी होता है। अलीगंज के पुराने हनुमान मंदिर में बजरंगबली से मन्नते मांगने के लिए श्रद्धालु आते हैं। उनकी कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।