
लखनऊ. दूध हमारे शरीर के लिए सबसे फायदेमंद पेय है। इसके सेवन से शरीर को मजबूती मिलती है और शरीर चुस्त दुरुस्त होता है। इसी लिए बच्चों को सबसे पहले दूध का सेवन कराया जाता है जिससे की उसके शरीर को सभी प्रकार के प्रोटीन, विटामिन मिल सके। जिससे की उसके शरीर की ग्रोथ हो सके।लखनऊ के इंदिरा नगर में रहने वाली डाइटीशियन संगीता श्रीवास्तव ने बताया कि हमारी हड्डियों को पूरी तरह मजबूत बनाने के लिए हम लगातार दूध का सेवन करते हैं। दूध में प्रोटीन, कैल्शियम बहुत ही भरपूर मात्रा में पाया जाता हैं जिससे हमारी हड्डियां बहुत मजबूत होती हैं, लेकिन कई लोग बिना मलाई का दूध पीते हैं। उनका कहना है कि उनको मलाई का दूध कतई पंसद नहीं हैं।लेकिन एक रिसर्च में यह सामने आया है कि बिना मलाई का दूध सेहत के लिए फायदेमंद नहीं होता हैं। बिना मलाई का दूध पीकर आप बीमारियों को आमंत्रण दे रहे हैं।
मलाई वाला दूध पिएंगे तो दूर रहेंगे पार्किंसन से
एक रिसर्च में दावा किया गया है कि बिना मलाई वाला दूध पीने से पार्किंसन बीमारी होने की आशंका 39 फ़ीसदी तक बढ़ जाती है। डाइटिंग को फैशन की तरह अपनाने वालों को चेताने वालि इस रिसर्च मेडिकल जर्नल न्यूरोलॉजी में प्रकाशित हुई है। फॉरवर्ड यूनिवर्सिटी में की गई रिसर्च के अनुसार कम वसा वाले डेयरी उत्पादों के नियमित सेवन और मस्तिष्क की सेहत या तंत्रिका संबंधी स्थिति के बीच एक अहम जुड़ाव है। बिना मलाई वाला या कम मलाई वाला दूध पीने से शरीर को वसा की जरूरी मात्रा नहीं मिल पाती। इससे पार्किंसन को बढ़ावा मिलता है। नई दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में वरिष्ट कंसलटेंट डॉ. माधुरी बिहारी ने बताया कि पार्किंसन में मस्तिष्क के उस हिस्से की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं जो गति को नियंत्रित करता है। कम्पन, मांसपेशियों में सख्ती व तालेमल की कमी और गति में धीमापन इसके आम लक्षण हैं।
रिसर्च के अनुसार...
जो लोग नियमित रूप से दिन में एक बार बिना मलाई वाला या आधी मलाई वाला दूध पीते थे, उन्हें पार्किंसन होने की आशंका ज्यादा थी। हफ्ते में एक बार मलाईदार दूध पीने वालों में यह आशंका 39 फीसदी कम थी। जो लोग नियमित रूप से पूरी मलाईवाला दूध पीते थे उनमें यह जोखिम नजर नहीं आया।
पार्किंसन रोग
पार्किंसन रोग (Parkinson's disease or PD) केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र का एक रोग है जिसमें रोगी के शरीर के अंग कंपन करते रहते हैं। यह धीरे-धीरे विकसित होता है। यह रोग कभी-कभी केवल एक हाथ में होने वाले कम्पन के साथ शुरू होता है। लेकिन, जब कंपकपी पार्किंसन रोग का सबसे मुख्य संकेत बन जाती है तो यह विकार अकड़न या धीमी गतिविधियों का कारण भी बनता है। पार्किंसन रोग के शुरुआती चरणों में, आपके चेहरे के हाव भाव कम या खत्म हो सकते हैं या चलते समय आपकी बाजुएं हिलना बंद कर सकती हैं। आपकी आवाज़ धीमी या अस्पष्ट हो सकती है। समय के साथ पार्किंसन बीमारी के बढ़ने के कारण लक्षण गंभीर हो जाते हैं।
पार्किंसन रोग के संकेत और लक्षण
- कंपन
-धीमी गतिविधि
- कठोर मांशपेशियां
- बिगड़ी हुई मुद्रा और असंतलन
- स्वचालित गतिविधियों की हानि
- आवाज़ में परिवर्तन
- लिखावट में परिवर्तन
Published on:
11 Apr 2018 10:08 am
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