
भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर ने बताया नाम के आगे से 'रावण' हटाने का कारण
प्रशांत श्रीवास्तव, लखनऊ. पिछले दिनों जेल से लौटे भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने अपने नाम के आगे से रावण हटा लिया है। उनका कोई विरोधी 'राम बनाम रावण' मुद्दा न बना सके इसलिए उन्होंने ये शब्द हटाया। इन दिनों वह फिर से दलित समाज को एकजुट करने के लिए एक्टिव हो गए हैं। बीते सोमवार वह आयोध्या पहुंचे। मंदिर मुद्दे से वहां बने 'माहौल' पर चिंता जताते हुए उन्होंने डीएम को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद लखनऊ लौटकर पत्रिका से बातचीत में अपने भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया-
सवाल- ऐसे मौके पर अयोध्या जाकर क्या आप भी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रहे थे
जवाब- नहीं, मेरे पास अयोध्या से भी बड़ी संख्या में लोग लगातार फोन कर रहे थे। वह लोग खौफ में थे इसलिए मैं अयोध्या गए। वहां के बहुजन समाज के लोगों से मुलाकात की। इसके अलावा डीएम को संविधान की प्रति दी और कहा कि आपने संविधान की शपथ ली है इसी के मुताबिक काम करें।
सवाल- वहां पर आपने अयोध्या का नाम बदलने को लेकर भी बयान दिया, आपका भी नाम बदलने पर जोर है.
जवाब- अयोध्या को 'साकेत' प्रदेश भी कहा जाता था इसलिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध है कि जब वह और अन्य जगहों का नाम बदल रहे हैं तो अयोध्या का नाम भी 'साकेत' किया जाए। इसके अलावा वहां बौद्ध विहार भी बनाया जाए।
सवाल- आप मायावती के समर्थन की बात करतें हैं जबकि वह तो आपको समर्थक मानती नहीं हैं।
जवाब- बहन जी को गलतफहमी हो गई है। मैं तो उनके साथ था , हूं और रहूंगा। कुछ बाहर के लोगों ने उन्हें भड़काया होगा। मैं 2019 में बीजेपी के खिलाफ प्रचार करूंगा। बहुजन समाज के लोगों को मेरा पूरा समर्थन है। देश में बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन होना चाहिए जिसके नेतृत्व का मौका मायावती जी को मिले।
सवाल- क्या आप खुद 2019 का चुनाव लड़ने जा रहे हैं?
जवाब- नहीं, मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा। मैं काशीराम के दिखाए रास्ते पर चलूंगा।राजनीति चले न चले, सरकार बने न बने लेकिन हम मूवमेंट नहीं रुकने देंगे। मेरी ओर से पिछले दिनों मायावती को तीन बार फोन भी किया गया लेकिन बात नहीं हो पाई। फिर भी हम अपने समाज से मायावती को पूरा समर्थन देने की अपील करते रहेंगे।
सवाल- जेल से लौटकर आपने नाम से 'रावण' शब्द क्यों हटा लिया.
जवाब- ये मेरा निजी फैसला है। मैं नहीं चाहता था कि विरोधी इस शब्द को लेकर अपनी राजनीति करें। इस कारण मैंने ये शब्द हटा लिया। कल को मैं चुलबुल पांडे या कुछ भी लगा लूं अपने नाम के आगे लेकिन इससे अपने विरोधियों को निशान साधने का मौका नहीं बनने देना चाहता।
सवाल- बीजेपी के खिलाफ आप प्रचार करेंगे तो क्या आप कांग्रेस का साथ देंगे
जवाब- कांग्रेस भी दलित हितैषी नहीं है। अगर वह दलितों का सम्मान करती है तो मायावती जी को नेतृत्व करने का मौका दे। कांग्रेस के नेता इमरान मसूद से मेरे अच्छे संबंध है लेकिन ये कांग्रेस पार्टी के वजह से नहीं बल्कि व्यक्तिगत संबंध हैं। मैं दलित-मुस्लिम यूनिटी का हमेशा से समर्थक रहा हूं।
Published on:
27 Nov 2018 01:43 pm
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