लखनऊ

नम-भूमि को बचाना बड़ी चुनौती, यूपी में Wetland से मिलेगा किसानों को रोजगार- डॉ काशिफ इमदाद

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नम भूमि क्षेत्र या वेटलैंड को लेकर एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें इन क्षेत्रों के संरक्षण पर ज़ोर दिया गया। डॉ काशिफ इमदाद ने पत्रिका डॉट कॉम से विशेष बातचीत के दौरान कहा कि हमें जल्दी ही ऐसे क्षेत्रों को बचाने के लिए कुछ जरूरी ठोस कदम उठाने की जरूरत है। अभी पूरी दुनिया में आस्ट्रेलिया, नमभूमि संरक्षण की मुहिम सबसे आगे है। हमें प्लानिंग करके प्रकृति को बचाना होगा।

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Dec 20, 2021
Picture During Programe

पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में किसानों की सबसे बड़ी समस्या ऊसर और गैर उपजाऊ क्षेत्रो को लेकर है। जिसके समाधान को लेकर हर स्तर पर सरकार और अन्य संस्थान प्रयासरत हैं। ऐसा ही एक कार्यक्रम राजधानी आयोजित किया गया।

क्या है वेट लैंड क्षेत्र

वेटलैंड ऐसा भू-भाग होता है जहां के पारितंत्र का बड़ा हिस्सा स्थायी रूप से या प्रतिवर्ष किसी भी मौसम में जल से डूबा हो। ऐसे क्षेत्रों में जलीय पौधों की मात्रा अधिक रहती है। ऐसा भाग वेटलैंड को परिभाषित करता है। जैव विविधता की दृष्टि से वेटलैंड अत्यंत संवेदनशील होते हैं क्योंकि विशेष प्रकार की वनस्पति व अन्य जीव ही नमभूमि पर उगने और फलने-फूलने के लिये अनुकूलित होते है।

चार चरणों में सम्पन्न हुआ कार्यक्रम

एक दिवसीय चलने वाले कार्यक्रम चार चरणों मे सम्पन्न हुआ। जिसमें नम भूमि (Wetland) पर सभी ने अपने अपने विचार व्यक्त किए। दूसरे चरण मे हमारे मुख्य अतिथि गणों ने नम भूमि से सम्बन्धित परियोजनाओं का प्रस्तुती करण किया गया।

जिनमे डा. रवि कुमार सिंह (आई. एफ. एस.) ने नम भूमि से सम्बन्धित कुछ मुख्य आंकड़ों को सामने रखा एवं नम भूमि से सम्बन्धित समस्याओं का उलेखन एवं समाधान प्रस्तुत किया।

प्रो. वेंकटेश दत्त ने नम भूमि के सर्वेक्षण का एक महत्वपूर्ण प्रस्तुतीकरण किया जिनमे उन्होंने बताया कि किस तरह नम भूमि का क्षरण पिछले गत वर्षों से लगातार हो रहा है। प्रायोगिक तरीके से इसका समाधान कैसे किया जा सकता है। इसी कड़ी मे डा वी राजमणि ने सुर सरोवर एवं उत्तर प्रदेश के अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं का एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।

तृतीय चरण मे उपस्थित विशेषज्ञों ने किसान मित्रों से बातचीत की एवं उनकी समस्याओं को सुन एवं उनके निवारण हेतु समाधान प्रस्तुत किया। जिसमे मे मछली पालक, सिंघाड़ा उत्पादक, किसान मित्र आदि मौजूद रहें।

चौथे एवं अंतिम चरण मे एक सिमपोसिया का आयोजन किया गया। जिसमे विशेषज्ञों की ससंगोष्ठी मे नमभूमि संरक्षण से संबंधित मुद्दों एवं इस संबंध मे कार्य योजना निर्माण हेतु गहन विचार विमर्श किया गया। कार्यक्रम का समापन डा पी. के. सिंह. (नेशनल पी. जी. कालेज) के कृतज्ञ शब्दों से हुआ.

Updated on:
23 Dec 2021 06:50 pm
Published on:
20 Dec 2021 07:51 pm
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