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बड़ा घोटाला- आधार कार्ड के नंबरों में हेराफेरी कर हड़प लिया गरीबों का अनाज

कंप्यूटराइज्ड तकनीक में ही सेंध लगाकर कर दी गड़बड़ी।  

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बड़ा घोटाला- आधार कार्ड के नंबरों में हेराफेरी कर हड़प लिया गरीबों का अनाज

लखनऊ. जिस तकनीक का इस्तेमाल कर सरकार भ्रष्टाचार रोकने का प्रयास कर रही है, उसी तकनीक में सेंध लगाकर उनके ही अफसर और कर्मचारी सरकार के प्रयासों पर पानी फेर रहे हैं। सूबे में एक और अनाज घोटाला सामने आया है। आधार कार्डों के नंबरों में हेराफेरी कर गरीबों के हिस्से का अनाज हड़प लिया गया। इस मामला उस समय उजाकर हुआ जब खाद्य आयुक्त आलोक कुमार ने जांच कराई। जांच में सामने आया कि घोटालेबाजों ने पारदर्शिता लाने के लिए लागू की जा रही कंप्यूटराइज्ड तकनीक में ही सेंध लगाकर यह गड़बड़ी की है।

सूबे में अब तक 43 जिलों की जांच में पता चला कि सर्वाधिक गड़बड़ी इलाहाबाद में की गई है। इसके बाद मेरठ, मुजफ्फरनगर व गाजियाबाद का नंबर है। वहीं लखनऊ में भी इस तरह से घोटाला किया गया। सबसे बड़ी बात यह है यह है कि शहरी क्षेत्रों में ही अधिकतर यह घोटाला किया गया क्योंकि घोटालेबाजों ने यह गड़बड़ी वहीं पर की है, जहां ई-पास (इलेक्ट्रानिक पाइंट ऑफ सेल) मशीनों से अनाज वितरण की व्यवस्था लागू है। ई-पास की सुविधा अभी शहरी क्षेत्रों में स्थित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खुली दुकानों पर ही उपलब्ध हो पाई है।
खाद्य आयुक्त ने बताया कि कुछ जिलों के जिला पूर्ति अधिकारियों ने कंप्यूटराइज्ड तकनीक का दुरुपयोग कर अनाज वितरण में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए शिकायत की थी। इस पर राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) से जांच कराई गई। केवल जुलाई महीने के डाटा की जांच में यह पता चला है कि ई-पास मशीनों से अनाज वितरण वाले इलाकों में आधार कार्डों के नंबरों में हेराफेरी कर यह अनाज घोटाला किया गया है।

फिर उसके डाटाबेस में अपडेट कर दिया गया
इससे यह तो साफ हो गया है कि अगर गहराई से जांच कराई जाए तो काफी बड़ा घोटाला सामने आएगा। खाद्य आयुक्त ने जिला पूर्ति अधिकारियों को पूरे घोटाले का गहराई से जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करने व पूरी रिपोर्ट मुख्यालय भेजने की हिदायत दी है।
जांच से पता चला कि कोटेदारों ने तकनीकी ऑपरेटरों से मिलकर वास्तविक लाभार्थी के डाटाबेस में फीड उसके आधार संख्या को एडिट कर किसी अन्य व्यक्ति की आधार संख्या को फीड कर दिया। फिर इस अन्य व्यक्ति के अंगुलियों के निशानों का इस्तेमाल कर स्टॉक से अनाज निकाल लिया गया। ट्रांजेक्शन प्रक्रिया पूरी होने के बाद वास्तविक लाभार्थी के आधार संख्या को फिर उसके डाटाबेस में अपडेट कर दिया गया। इस तरह वास्तविक लाभार्थी को सस्ते अनाज की सुविधा से वंचित कर अपराध किया गया।