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सपा-बसपा को बड़ा झटका तय, बीजेपी यूपी में बनाएगी इतने जिला पंचायत अध्यक्ष, टूट जाएंगे सारे पुराने रिकॉर्ड

- बीजेपी से ज्यादा सपा-बसपा की सरकारों में निर्विरोध जीते थे जिला पंचायत अध्यक्ष - अखिलेश सरकार में 38 जीते थे निर्विरोध - मायावती सरकार में 20 जीते थे निर्विरोध - भाजपा का लक्ष्य 65 सीटें

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लखनऊ

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Nitin Srivastva

Jul 01, 2021

सपा-बसपा को बड़ा झटका तय, बीजेपी यूपी में बनाएगी इतने जिला पंचायत अध्यक्ष, टूट जाएंगे सारे पुराने रिकॉर्ड

सपा-बसपा को बड़ा झटका तय, बीजेपी यूपी में बनाएगी इतने जिला पंचायत अध्यक्ष, टूट जाएंगे सारे पुराने रिकॉर्ड

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में हो रहे जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव को लेकर अखिलेश यादव और मायावती दोनों ही लगातार आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। एक तरफ जहां मायावती ने चुनावों में धांधली का आरोप लगाकर इससे किनारा कर लिया, तो वहीं दूसरी तरफ सपा का कहना है कि उनके प्रत्याशियों को या तो पर्चा नहीं भरने दिया गया या फिर उनका पर्चा खारिज करा दिया गया। इटावा को छोड़कर बाकी 22 सीटों पर बीजेपी कैंडिडेट के निर्विरोध निर्वाचन को सपा जोर जबरदस्ती की जीत बता रही है। दरअसल यह इतिहास रहा है कि जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में, जिसकी सरकार होती है उसका ही बोलबाला होता है। अगर बात इससे पहले 2016 में हुए जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की करें तो, तब अखिलेश यादव की सरकार थी। उससे पहले 2010 में जब चुनाव हुए थे तब मायावती की सरकार थी। दोनों ही सरकारों में सपा और बसपा के प्रत्याशी बड़ी संख्या में निर्विरोध ही चुने गए थे। वहीं बीजेपी ने 75 जिलों के चुनाव में अपना लक्ष्य 65 सीटों का रखा है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या भाजपा पुराना रिकॉर्ड तोड़ पाएगी।

सपा-बसपा की सरकार ने भी बनाए थे इतने जिला पंचायत अध्यक्ष

2016 में हुए जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की अगर बात करें तो, तब प्रदेश में अखिलेश यादव की सपा सरकार थी। 2016 के चुनाव में 74 में से 38 जिलों में जिला पंचायत के अध्यक्ष निर्विरोध चुनाव जीते थे। 75 वें जिले नोएडा में चुनाव नहीं हुआ था। जिन जिलों में निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव जीते थे उनमें फैजाबाद, फिरोजाबाद, गोंडा, कानपुर देहात, कासगंज, भदोही, संत कबीर नगर, जालौन, बस्ती, अमरोहा, इटावा, बाराबंकी, श्रावस्ती, एटा, महोबा, देवरिया, कानपुर नगर, बलिया, गाजीपुर, सिद्धार्थ नगर, सहारनपुर, अमेठी, ललितपुर, मऊ, चित्रकूट, बदायूं, हरदोई, बागपत, हमीरपुर, झांसी, मैनपुरी, बहराइच, गाजियाबाद, लखनऊ, संभल, आजमगढ़, लखीमपुर खीरी और बुलंदशहर शामिल थे। वहीं साल 2010 में जब प्रदेश में मायावती की सरकार थी तब 72 में से 20 जिलों में जिला पंचायत के अध्यक्ष निर्विरोध चुनाव जीते थे। इनमें मेरठ, नोएडा, बुलंदशहर, बिजनौर, अमरोहा, रामपुर, गाजियाबाद, कासगंज, महोबा, हमीरपुर, बांदा, कौशांबी, उन्नाव, लखनऊ, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, श्रावस्ती, बलरामपुर, चंदौली और वाराणसी जिले शामिल हैं।

इतिहास दोहराएगी योगी सरकार

सपा और बसपा की सरकारों का वही इतिहास बीजेपी की योगी सरकार में भी दोहराया गया है। 75 जिलों में से 22 जिलों में इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष निर्विरोध विजयी घोषित किए गए हैं। जिन जिलों में ऐसा हुआ है वे जिले मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, अमरोहा, मुरादाबाद, आगरा, इटावा, ललितपुर, झांसी, बांदा, चित्रकूट, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, शाहजहांपुर, गोरखपुर, मऊ, वाराणसी, पीलीभीत, सहारनपुर और बहराइच हैं। यानी तीनों ही सरकारों में एक्का-दुक्का सीटों को छोड़कर बाकी सभी सीटों पर सत्ताधारी दल के ही लोग निर्विरोध चुनाव जीते।

भाजपा का लक्ष्य 65 सीटें

बीजेपी ने इस बार के जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में 75 जिलों में अपना लक्ष्य 65 सीटों का रखा है। कहा जा रहा है कि समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान हुए चुनावों में 38 सीटों पर निर्विरोध कब्जा किया था, वहीं 36 सीटों पर हुए चुनावों में 23 सीटों पर सपा का कब्जा था। यही वजह है कि इस बार बीजेपी ने भी अपना लक्ष्य 65 प्लस का रखा है। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनावों में बीजेपी ने 21 सीटों पर निर्विरोध ही जीत दर्ज की है। वहीं एक सीट सपा के खेमे में गई है। अब बाकि 53 सीटों पर 3 जुलाई को चुनाव होगा। इनमें से ज्यादातर सीटों पर सपा और भाजपा की सीधी टक्कर होगी। बीजेपी का दावा है कि 90 फीसदी सीटों पर उनकी पार्टी ही जीत दर्ज करेगी।

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