
बीजेपी के लिए मुसीबत बने योगी के बागी विधायक, पार्टी में मचा हड़कंप
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लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके विरोधियों से कोई खौफ नहीं है, उनके लिए सबसे बड़ा खतरा देश के बुद्धिजीवियों की खतरनाक चुप्पी है जो उन्हें चुनाव में हरा सकते हैं। योगी ने यह बातें शुक्रवार को आगरा में भारतीय जनता पार्टी की ओर से आयोजित प्रबुद्ध जन सम्मेलन कार्यक्रम में बोलते हुए कहीं थीं। लेकिन भाजपा को सबसे बड़ा खतरा पार्टी के विद्रोही विधायकों और उसके खुद के बौद्धिक वर्ग से है। पार्टी के तमाम विधायक सरकार की नीतियों से असंतुष्ट हैं। अब विधान परिषद जिसे बौद्धिकों का सदन कहा जाता है के विधायक भी योगी की नीतियों से नाराज हैं। भाजपा के दो एमएलसी जो कि शिक्षकों के वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं उन्होंने सरकार को कार्यप्रणाली सुधारने की चेतावनी दी है। इससे योगी की मुश्किलें बढ़ गयी हैं।
योगी के कार्यकाल में कार्यकर्ताओं की घोर उपेक्षा
परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के ऑनलाइन अंतर्जनपदीय तबादलों पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य डॉक्टर यज्ञदत्त शर्मा ने बगावती तेवर दिखाए हैं। उन्होंने अपनी ही सरकार पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शर्मा ने कहा है कि प्रदेश की नौकरशाही बेलगाम हैं। विधायकों के पत्रों का प्रोटोकाल के तहत जवाब भी अधिकारी नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा है कि योगी के राज में भाजपा का आम कार्यकर्ता भी हताश और निराश है। यह स्थिति को पार्टी के लिए नुकसानदेह है। उन्होंने योगी के लिखे अपने पत्र में कहा है कि सीएम योगी के कार्यकाल में कार्यकर्ताओं की घोर उपेक्षा हो रही है।
कौन हैं यज्ञदत्त शर्मा
यज्ञदत्त शर्मा प्रदेश के जाने माने शिक्षक नेता हैं। यह इलाहाबाद झांसी स्नातक क्षेत्र से विधानपरिषद के सदस्य हैं।
योगी के अफसर भ्रष्टाचार को दे रहे बढ़ावा
भाजपा एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा है कि सीबीआई ने लोक सेवा आयोग के अपर निजी सचिव उत्तर प्रदेश सचिवालय 2010 में ज़बरदस्त भ्रष्टाचार पाया है और सीबीआई भर्ती की जांच करना चाहती है। पर प्रदेश के जिम्मेदार अधिकारी इस जांच का आदेश नहीं दे रहे हैं। वे ऐसा भ्रष्टाचार की दुरभिसंधि के कारण कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार में अफसरशाही बेलगाम है। इस लेटर के सामने आने से सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टोलरेंस की नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विधायक ने लोक सेवा आयोग में हुई भर्ती की जांच की मांग की है।
कौन हैं देवेंद्र प्रताप
देवेंद्र प्रताप सिंह गोरखपुर फैज़ाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी हैं। विधायक के इस पत्र के सामने आने के बाद से मुख्यमंत्री कार्यालय और सरकार में हडक़ंप मच गया है।
योगी के मंत्री अवैध शराब के धंधे में
देवरिया के बरहज से बीजेपी विधायक सुरेश तिवारी भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर गंभीर आरोप लगा चुके हैं। उनका कहना था कि सीएम योगी विधायकों की नहीं सुनते हैं। अगर किसी अधिकारी की शिकायत करो, तो कहते हैं कि राजनीति छोड़ दो। उन्होंने योगी सरकार के अफसरों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। यही नहीं योगी मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री जयप्रकाश निषाद पर हमला करते हुए सुरेश तिवारी ने कहा था कि रुद्रपुर कस्बे में कई स्थानों पर अवैध शराब का धंधा चलता है। इस धंधे को राज्यमंत्री निषाद का लडक़ा और उनके गुर्गे चलाते हैं।
योगी सरकार में किरकिरी हो रही, गरीब नहीं देगा वोट
बलिया से भाजपा सांसद रवीन्द्र कुशवाहा और बैरिया विधायक सुरेंद्र सिंह अपनी ही सरकार के खिलाफ अनाप-शनाप बोलते रहे हैं। सांसद जहां सलेमपुर रेलवे स्टेशन पर बार-बार कुछ ट्रेनों के ठहराव का अनुरोध न सुने जाने को लेकर नाराज हैं। वहीं, बीजेपी विधायक भ्रष्टाचार को लेकर योगी सरकार के खिलाफ धरना देने तक की धमकी दे चुके हैं। इन नेताओं का कहना है कि योगी सरकार को लेकर जनता में बहुत किरकिरी हो रही है। लोग बहुत नाराज हैं। उनका कहना है कि गरीब व्यक्ति थाने, तहसील और ब्लॉक पर अपनी समस्या लेकर जायेगा और उसकी सुनवाई नहीं होगी तो वह बीजेपी को वोट नहीं देगा।
नीलम करवारिया करा चुकी हैं बुद्धि-शुद्धि यज्ञ
इलाहाबाद के मेजा से भाजपा विधायक नीलम करवारिया भी योगी सरकार से नाराज चल रही हैं। उनके मुताबिक नौकरशाह उप्र में सरकार चला रहे हैं। योगी सरकार के 100 दिन पूरा होने पर जब प्रदेश में भाजपा जश्न मना रही थी तो नीलम करवारिया योगी सरकार की बुद्धि को शुद्ध करने के लिए संगम तट स्थित हनुमान मंदिर में बुद्धि-शुद्धि यज्ञ करवाया था और हस्ताक्षर अभियान चलाया था।
सहयोगी पार्टी के विधायक ने भी खोला मोर्चा
भाजपा की सहयोगी सरकार में शामिल पार्टी अपना दल के विधायक भी अपने शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ बगावत पर उतर आए हैं। प्रतापगढ़ के विश्वनाथगंज विधानसभा से विधायक डॉ. आरके वर्मा ने पार्टी प्रमुख अनुप्रिया पटेल के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा है कि जो मां की नहीं हो सकती वो भाजपा और कुर्मी समाज की क्या होगी। केवल कुछ होगा तो कुर्मी समाज का सौदा और कुछ भी नहीं होगा। उनके इस बयान के बाद अपना दल पार्टी के दो फाड़ होने के संकेत मिल रहे हैं। भाजपा अनुप्रिया पटेल को कुर्मियों का बड़ा नेता प्रोजेक्ट कर रही है। लेकिन पार्टी में उनके नेतृत्व को लेकर विरोध खड़ा होने से भाजपा पेशोपेश में है। पार्टी में चल रहे अंदरूनी कलह के चलते लखनऊ में आयोजित डॉ. सोने लाल जयंती के कार्यक्रम में भी विधायक डॉ. आरके वर्मा शामिल नहीं हुए थे।
गौरतलब है कि इसके पहले सांसद सावित्री बाई फुले, छोटेलाल खरवार, अशोक दोहरे और उदितराज दलित उत्पीडऩ को लेकर सीएम योगी को कटघरे में खड़े कर चुके हैं। जबकि बीजेपी के सहयोगी और सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर लगातार सीएम योगी सरकार पर लगातार हमलावर हैं।
Published on:
07 Jul 2018 04:51 pm
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