
लखनऊ. राजस्थान और पश्चिम बंगाल में लोकसभा और विधानसभा की सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा की करारी हार ने लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में भाजपा की नींद उड़ा दी है। राजस्थान की दो लोकसभा और एक विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे गुरुवार को सामने आये जबकि पश्चिम बंगाल में एक लोकसभा और एक विधान सभा चुनाव के नतीजे भी घोषित हुए हैं। राजस्थान की तीनों सीटों पर कांग्रेस और पश्चिम बंगाल की दोनों सीटों पर तृणमूल की जीत के बाद भाजपा संगठन की नींद उड़ गई है। लोकसभा आमचुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर भी उपचुनाव होने हैं जो भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न हैं।
उत्तर प्रदेश में गोरखपुर सीट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे से खाली हुई है जबकि फूलपुर सीट उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे से खाली हुई है। इन दोनों सीटों पर मार्च से पहले उपचुनाव कराये जाने हैं। उत्तर प्रदेश नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों से उत्साहित भाजपा इन दोनों सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर अब तक आश्वस्त थी लेकिन अब ताजा चुनाव नतीजों ने पार्टी की टेंशन बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि पार्टी लोकसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए नई रणनीति तैयार करने के काम में जुट गई है क्योंकि राजस्थान और पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजे उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों के लिए ऑक्सीजन का काम करेंगे।
इन चुनाव नतीजों के बाद माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव में उन सांसदों के टिकट भी काटे जायेंगे, जिनकी स्थिति संगठन की नजर में खराब होगी। निष्क्रिय और जन समस्याओं पर ध्यान न देने वाले सांसदों की पार्टी संगठन के स्तर पर मॉनिटरिंग करने की तैयारी है। जानकर बताते हैं कि प्रदेश के उन सभी सांसदों के टिकट काटे जायेंगे जिनकी स्थिति क्षेत्र में कमजोर पाई जाएगी। फिलहाल भाजपा संगठन इन चुनाव नतीजों के बाद सक्रिय हो गई है और आगामी चुनावों को लेकर अपनी अगली रणनीति साधने में जुटी है।
Published on:
01 Feb 2018 06:41 pm
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