बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के खत्म होने के बाद यूपी बीजेपी संगठन में फेर बदल देखने को मिल सकता है।
भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनाव से पहले अपने संगठन को मजबूत करेगी। यूपी में नगर निकाय चुनाव टल गया है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही यूपी संगठन में फेर बदल देखने को मिल सकते हैं।
सोमवार को यानी आज बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक खत्म हो हुई। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल लोकसभा चुनाव तक के लिए बढ़ा दिया गया है। अब 2024 लोकसभा का चुनाव उन्हीं के नेतृत्व में होगा।
संगठन में बदलाव को लेकर हुई चर्चा
पिछले दिनों भाजपा के बीजेपी संगठन महामंत्री बीएल संतोष के साथ प्रदेश के राजधानी आए थे। उनके साथ प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह चौधरी और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह भी थे। वें प्रदेश संगठन में बदलाव के बारे में चर्चा कर चुके हैं।
तीन मंत्रियों की विदाई तय
भाजपा के एक व्यक्ति, एक पद के सिद्धांत में फिलहाल तीन प्रदेश पदाधिकारी फिट नहीं बैठते हैं। इनमें प्रदेश उपाध्यक्ष अरविंद कुमार शर्मा व दयाशंकर सिंह और प्रदेश महामंत्री जेपीएस राठौर शामिल हैं। जब प्रदेश में दूसरी बार योगी सरकार बनी तो अरविंद कुमार शर्मा को ऊर्जा और नगर विकास मंत्री, जेपीएस राठौर सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और दयाशंकर सिंह परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। ऐसा में माना जाता है कि इन तीनों मंत्रियों की संगठन से विदाई तय है।
इनके अलावा बीजेपी के कुछ पुराने नेताओं को बदला जा सकता है। भाजपा में यह परंपरा रही है कि संगठन में 40 प्रतिशत चेहरे नए हों। पुराने चेहरों को हटाकर उनकी जगह नए लोगों को लाने में पार्टी जातीय और क्षेत्रीय समीकरण का ध्यान रखेगी।
पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष बदले जा सकते
भाजपा के सात मोर्चों में से कुछ के प्रदेश अध्यक्ष बदले जाने की सुगबुगाहट है। पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष नरेंद्र कश्यप राज्य सरकार में पिछड़ा वर्ग एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार हैं। इस वजह से उन्हें मोर्चा के अध्यक्ष पद से हटाया जाना तय है।
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प्रांशु दत्त को संगठन में मिल सकता है नया पद
वहीं युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रांशु दत्त द्विवेदी विधान परिषद सदस्य बन गए हैं। इसलिए उन्हें भी हटाए जाने तय माना जा रहा है। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष गीता शाक्य राज्य सभा सदस्य हैं। लिहाजा महिला मोर्चा को नया मुखिया मिल सकता है। इस सबके अलावा क्षेत्रीय और जिला स्तर पर संगठन में बदलाव देखने को मिल सकता है।