लखनऊ. एक्यूट ल्यूकीमिया और मल्टीपल माइलोमा नामक रक्त से संबंधित कैंसर के केस में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। इस तरह के कैंसर पीड़ित मरीजों में कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी विधि से उपचार संभव नहीं रह जाता है, जिनके लिये बोन मैरो ट्रांसप्लांट करना ही एक चारा रह जाता है।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट यानी अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण के जरिये कैंसर मरीजों की जान बचाई जा सकती है। अब तक ये आसान नहीं था, लेकिन नई तकनीक काबिल डॉक्टरों ने इसे आसान बना दिया है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट के जरिये पीड़ित व्यक्ति की प्रभावित बोन मेरो को हेल्दी बोन मैरो से बदल दिया जाता है। ऐसा ही एक सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट कर दिखाया है आईजीआईएमएस पटना के ऑन्कोलोजी विभाग के एचओडी डॉ. अविनाश पांडेय ने। आईजीआईएमएस पटना ने पूर्वी यूपी से जुड़े बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं।