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BRAHMOS: देश के दुश्मनों को मिट्टी में मिला देगी यूपी के इन जिलों में बनने वाली ब्रम्होस मिसाइल और ड्रोन

राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर अब उत्तर प्रदेश नया शिला लेख लिखने जा रहा है। तमिलनाडू के साथ ही अब उत्तर प्रदेश में भी देश की रक्षा जरुरतों के हिसाब से आयुधों का निर्माण होगा, जिसकी पूरी तैयारी कर ली गई है।

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ब्रम्होस मिशाइल

BRAHMOS: विदेशों से आने वाले हथियार शर्तो के अधीन होते हैं, जो किसी भी सम्प्रभु राष्ट्र के लिए उचित नहीं होता। केंद्र सरकार ने देश की रक्षा जरुरतों के हिसाब से उत्पादन की शुरुआत किया है। आत्मनिर्भर भारत के तहत अब उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में रक्षा इकाईयों की स्थापना की जा रही है।

जहां दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले हथियारों का उत्पादन शुरू हो जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि अब उत्तर प्रदेश सिर्फ नट बोल्ट का ही उत्पादन नहीं करेगा, बल्कि रक्षा जरुरतों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा होकर चीन और पाकिस्तान के दांत खट्टे करने वाले मिशाइल और ड्रोन का उत्पादन करेगा।

विदेशों पर निर्भरता होगी खत्म
यूपी रक्षा औद्यौगिक गलियारा में ब्रम्होस समेत अन्य मिशाइल, इलेक्ट्रानिक युद्ध प्रणाली, ड्रोन आदि का उत्पादन किया जाएगा जिससे विदेशों पर भारत की निर्भरता कम होगी। उत्तर प्रदेश साथ समुद्र तटीय राज्य तमिनाडू में भी रक्षा गलियारा तैयार किया जा रहा है, जहां पर उत्पादनों से भारतीय एयरोस्पेस और युद्धक सामग्री में विदेशों पर निर्भरता खत्म होती जाएगी।

उत्तर प्रदेश में इस कारिडोर के निर्माण के लिए करीब 1700 हेक्टेयर जमीन में से 95 प्रतिशत से अधिक जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है। इतना ही नहीं, 36 उद्योगों को करीब 600 हेक्टेयर जमीन भी उपलब्ध करा दी गई है। 109 एमओयू पर हस्ताक्षर भी किया जा चुका है जिसमें 16 हजार करोड़ का निवेश किया जाएगा। यूपीडीआईसी में करीब ढाई हजार करोड़ का निवेश भी किया जा चुका है।

कारगिल युद्ध के दौरान भारत को हथियार देने से इंकार हुआ था
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कहते हैं कि 1971 की लड़ाई में जब हमें रक्षा यंत्रों, हथियारों की जरुरत थी तब कई देशों ने हमें देने से मना कर दिया था। इसी तरह जब हम कारगिल की लड़ाई लड़ रहे थे तब भी कई देशों ने हमे हथियार देने से मना कर दिया था और हमें शांति का पाठ पढ़ा रहे थे। जबकि भारत मूल रुप से शांतिप्रिय देश है, आज भी भारत अपने संतों, ऋषियों की वाणी सर्वे भवंतु सुखिन: को आत्मसात किया है। हमारे हथियार किसी पर हमला करने के लिए नहीं होते लेकिन अगर कोई हमारे पर हमला करेगा, हमारी संम्प्रभुता पर चोट करेगा तो हम उसे माकूल जबाव देंगे।

यूपी के इन जिलों में होगा ब्रम्होस का उत्पादन
रक्षा उत्पादन के लिए यूपी के कुछ जिलों का चयन किया गया है। जहां पर भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही लगभग पूरी हो चुकी है। इनमें आगरा, अलीगढ़, चित्रकूट, झांसी, कानपुर, लखनऊ और देवरिया जिला की पहचान की गई है। आत्मनिर्भर भारत के तहत लक्ष्य है कि डीआरडीओ और उद्योगों को साथ मिलाकर काम किया गया तो हमारा घरेलू रक्षा उत्पादन एक लाख करोड़ रुपए को पार कर सकता है।

ब्रम्होस की खास बातें, इन्हें भी जानें
ब्रम्होस मिशाइल का नामकरण भारत की ब्रम्हपुत्रा और रूस की मस्कोवा नदी के नाम को जोडक़र किया गया।
यह मिशाइल हवा में ही अपना रास्ता बदलकर लक्ष्य पर हमला कर सकती है। इसका प्रयोग वर्टिकल या किसी भी दिशा में पनडुब्बी से लेकर वायुयान तक किया जा सकता है।

यह हमारी तीनों सेनाओं के काम आने वाली मिशाइल है। ब्रम्होस की खासियत है कि यह महज दस मीटर की दूरी पर उड़ान भर कर किसी भी तरह की राडार प्रणाली को धोखा दे सकती है। यह 1200 यूनिट उर्जा पैदा कर दुश्मनों के ठीकाने पर कहर बनकर गिरती है।

290 किलोमीटर तक मार करने वाली यह मिशाइल अपने साथ 300 किलो तक विष्फोटक ले जा सकती है। इसे बनाने में भारतीय और रसियन वैज्ञानिकों ने मिलजुल कर निर्माण किया है। जिसे विश्व की आधुनिकतम मिशाइल प्रणाली में शुमार किया गया है।