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इनकी वजह से हुआ BSP के कालेधन का खुलासा, चुनाव आयोग से की थी मांग

जिसकी वजह से बीते दिनों बहुजन समाज पार्टी का कालाधन पकड़ा गया है।

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Rohit Singh

Dec 28, 2016

mayawati

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लखनऊ।
नोटबंदी के बाद से राजनीतिक पार्टियों के खाते सार्वजनिक करने
की मांग कर रहे लोकतंत्र मुक्ति आंदोलन के संयोजक प्रताप चंद्रा ने कहा कि
उनकी ओर से किये गए आंदोलन की मुहिम रंग लायी है। जिसकी वजह से बीते दिनों
बहुजन समाज पार्टी का कालाधन पकड़ा गया है।


उन्होंने बताया कि
लोकतंत्र मुक्ति आंदोलन की मांग पर चुनाव आयोग ने 19 नवम्बर 2014 को सभी
राजनीतिक पार्टियों को आदेश जारी किया था कि सभी पार्टियाँ अपने नगद चंदे
को 10 दिनों के भीतर ही बैंक में जमा कराएं। जिसके बाद पार्टियों ने 8
नवम्बर को हुए नोटबंदी तक मिले नगद चंदे को 18 नवम्बर तक खाते में जमा करा
दें। अगर पार्टियों की ओर से ऐसा न किया गया तो 18 नवम्बर के बाद दलों
द्वारा नगद चंदा बैंक में जमा कराना न सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि आयोग के
आदेश का उलंघन भी है।


इसके बाद 26 नवम्बर को बहुजन
समाज पार्टी द्वारा अपनी पार्टी के खाते में 18 नवम्बर के बाद 104 करोड़
रुपये पुराने नोट के रूप में जमा कराये गए। जिसका खुलासा प्रवर्तन निदेशालय
की जांच में हुआ। उन्होंने मांग कि चुनाव आयोग इस सम्बन्ध में बहुजन समाज
पार्टी की मान्यता तत्काल रद्द करे।


प्रताप चंद्रा ने कहा कि
दुर्भाग्यपूर्ण है कि नोटबंदी से नेताओं और पार्टियों की चांदी हो गयी यानि
एडवांस में पैसा आ रहा है। नियम ऐसा कि पार्टियों से नहीं पूछा जाता कि
चंदा कहाँ से आया। इस पर नियंत्रण हो जाये तो काफी कालाधन समाप्त हो
जायेगा।


उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की नैतिक
जिम्मेदारी है। सार्वजनिक रूप से पारदर्शी रहना, सभी पार्टियों को अपना
खाता सार्वजनिक करना ही चाहिये जिससे जनता में उनके प्रति सुचिता और
विश्वास कायम रह सके।


पार्टियों का नोटबंदी से अबतक का खाता
सार्वजनिक करानें की मांग के लिए कल लखनऊ के हजरतगंज स्थित गाँधी प्रतिमा
पर पार्टियों से आग्रह किया जायेगा, जिससे पार्टियाँ अपने खाते सार्वजनिक
करें।




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