
kidney,kidney,CAA हिंसा मामला: योगी सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को SC में दी चुनौती, आज हो सकती है मामले की सुनवाई
लखनऊ. राजधानी लखनऊ में लगाए गए वसूली के पोस्टर पर सुप्रीम कोर्ट से उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath Government) को राहत नहीं मिली है। इन पोस्टरों को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हटाने का आदेश दिया था, जिसे योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और इस मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया है। फिलहाल जस्टिस उमेश उदय ललित (जस्टिस यू यू ललित) और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अवकाशकालीन बेंच इस मामले को बड़ी बेंच को भेजने का फैसला सुनाया। जस्टिस ललित ने कहा कि इस मामले को चीफ जस्टिस देखेंगे। सभी व्यक्ति जिनके नाम होर्डिंग्स में नाम हैं, उन्हें सुप्रीम कोर्ट के सामने मामले में पक्ष रखने की अनुमति दी गई है।
SC ने पूछा, क्या आप दो कदम आगे जाएंगे?
वहीं इससे पहले सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि निजता के अधिकार के कई आयाम हैं। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि यह बेहद महत्वपूर्ण मामला है। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि क्या उसके पास ऐसे पोस्टर लगाने की शक्ति है। सुनवाई के दौरान SC ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि हम आपकी बेचौनी समझ सकते हैं। आरोपियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन क्या आप दो कदम आगे जाएंगे। क्या आप आरोपियों की फोटो लगा सकते हैं? SC ने पूछा कि क्या वसूली की जो समय सीमा थी वह खत्म हो गई। फिलहाल तो कोई कानून आपको सपोर्ट नहीं कर रहा। अगर कोई कानून है तो बताइए।
फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
आपको बता दें कि सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को लखनऊ में लगे 57 उपद्रवियों के पोस्टर हटाने के आदेश दिए थे। सभी आरोपियों के पोस्टर हटाने के मामले में 16 मार्च तक यूपी सरकार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास रिपोर्ट सौंपनी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त हिदायत दी कि किसी भी आरोपी से संबंधित कोई भी निजी जानकारी कतई सार्वजनिक न की जाए, जिससे कि उसकी पहचान उजागर हो सके। लेकिन इस बीच योगी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। जिसपर आज सुनवाई हुई।
57 आरोपियों के लगे हैं पोस्टर
दरअसल लखनऊ में 19 दिसंबर को 2019 को हिंसा करने वाले 57 उपद्रवियों के पोस्टर चौराहे पर लगे हैं। इस पोस्टर में आरोपियों से 1 करोड़ 55 लाख की वसूली का आदेश भी हुआ है। जिसका स्वत: संज्ञान लेते हुए रविवार को चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर और जस्टिस राकेश सिन्हा की स्पेशल बेंच ने सुनवाई की थी और सोमवार को फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया। साथ ही लखनऊ के डीएम और पुलिस कमिश्नर को तत्काल पोस्टर और बैनर हटाए जाने का आदेश दिया। कोर्ट ने आरोपियों के पोस्टर लगाए जाने की कार्रवाई को अनावश्यक और निजता के अधिकार का उल्लंघन माना है।
Updated on:
12 Mar 2020 02:40 pm
Published on:
12 Mar 2020 09:53 am
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
