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अरबों की लागत से बने कैंसर अस्पताल में हर रोज आते हैं 6-7 मरीज, डाक्टर तैनात हैं 20

मरीजों की जांच के लिए मूलभूत सुविधाएं और उपकरण तक यहाँ उपलब्ध नहीं हैं।

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लखनऊ

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Laxmi Narayan

Aug 14, 2017

Cancer Institute of Lucknow At Chakganjaria ,Cancer institute

Cancer Institute Lucknow

लखनऊ. राजधानी लखनऊ के चक गंजरिया में 938 करोड़ रूपये की लागत से बन रहे कैंसर इंस्टीट्यूट में भले ही औपचारिक रूप से नौ महीने पूर्व ओपीडी सेवाओं की शुरुआत कर दी गई थी लेकिन अभी भी यह इंस्टीट्यूट कैंसर रोगियों के लिए किसी तरह से मददगार साबित नहीं हो पा रहा है। वाहवाही लूटने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ओपीडी की शुरुआत तो करा दी थी लेकिन मरीजों की जांच के लिए मूलभूत सुविधाएं और उपकरण तक यहाँ उपलब्ध नहीं हैं। एक बार जो मरीज आ जाए वह पलटकर दुबारा नहीं आना चाहता क्योकि यहाँ आने वाले मरीजों को जांच और सलाह के नाम पर सिर्फ इतनी जानकारी दी जाती है कि वह लखनऊ के किस अस्पताल में अपनी बीमारी का इलाज कराने जाए।

हर रोज आते हैं 6-7 मरीज, तैनात हैं 20 डाक्टर

हैरत की बात यह है कि ओपीडी सेवाओं की शुरुआत हुए भले ही नौ महीने हो गये हों लेकिन यहाँ अभी भी प्रतिदिन औसतन 6 या 7 मरीज ही आते हैं। मरीजों के लिए इस अस्पताल में अभी तक 20 डाक्टरों की तैनाती हो चुकी है। इसके अलावा पैरामेडिकल स्टाफ व अन्य कर्मचारियों की भी तैनाती की गई है। देश के सबसे बड़े कैंसर संस्थान के रूप में विकसित किये जा रहे इस इंस्टीट्यूट की शुरुआत जिस हड़बड़ाहट में की गई है, उससे पहली नजर में मरीजों के मन में इसे लेकर नकारात्मक सन्देश जा रहा है। भव्य और आलीशन तैयार और निर्माणाधीन भवन को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहाँ विश्वस्तरीय संस्थान का निर्माण किया जा रहा है लेकिन जिस तरह ओपीडी के नाम पर मरीजों के साथ छल किया जा रहा है, उससे सरकार और संस्थान की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।

एक साल से पहले नहीं शुरू हो सकेगी ओपीडी

कागजों पर भले ही ओपीडी की शुरुआत हो चुकी हो और डाक्टरों की नौकरी बरकरार रखने के लिए ओपीडी में पर्चे बनाकर मरीजों की जांच की जा रही हो लेकिन हकीकत यह है कि ओपीडी सेवा को ठीक तरीके से शुरू होने में कम से कम एक साल का समय लगेगा। संस्थान में अभी इनडोर फैसिलिटी उपलब्ध नहीं है। इसके साथ ही ओपीडी में मरीजों की जाँच के लिए जिन सामान्य उपकरणों की जरूरत होती है, वे भी उपलब्ध नहीं हैं। कई विभाग ऐसे हैं जिनके निर्माण का काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है। रेडियोलोजी विभाग के लिए मुंबई के एटॉमिक इनर्जी सेंटर से अनुमति की प्रक्रिया चल रही है। वहां से परमिशन मिलने के बाद ही रेडियोलॉजी विभाग के निर्माण का काम शुरू हो सकेगा।

संस्थान का दावा, मरीजों को बेहतर इलाज होगा उपलब्ध

भले ही अरबों रूपये खर्च हो जाने के बाद यह संस्थान सफ़ेद हाथी साबित हो रहा हो लेकिन संस्थान का दावा है कि यह संस्थान मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराएगा। इंस्टीट्यूट के सीएमएस डॉ देश पाल कहते हैं कि अभी ओपीडी सेवा पूरी तरह से शुरू नहीं हो सकी है क्योकि इनडोर की सुविधा नहीं है। यहाँ आने वाले मरीजों को परीक्षण के बाद किसी अन्य सेंटर के लिए रेफर कर दिया जाता है। मरीज को अन्य संस्थानों में भर्ती कराने के लिए भी संस्थान पूरा प्रयास करता है। अभी लगभग एक साल और निर्माण कार्य में लग सकता है जिसके बाद संस्थान की ओपीडी सेवा सुचारु रूप से शुरू हो सकेगी।