
pet sick
लखनऊ. जब कृष्णा नगर निवासी ऋषभ सिंह ने अपने आठ वर्षीय जर्मन शेफर्ड, 'जैक' के गर्दन के चारों ओर थोड़ी सूजन देखी तो उसने ये सोचा कि यह सूजन टॉन्सिल की वजह से होगा। डॉक्टर के पास जाने पर जो पता चला वे ऋषभ के लिए किसी झटके से कम नहीं था। जैक को डेंजरस स्टेज में लेकिमिया (रक्त कैंसर) डिगनोज़ किया गया। फिलहाल उसका इलाज बरेली के भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में उसकी कीमोथैरेपी चल रही है। ऋषभ का कहना है कि डॉक्टर अभी ये नहीं बता सकते कि जैक पूरी तरह वाकई दुरस्त हो सकेगा की नहीं।
आईवीआरआई के वैज्ञानिकों का कहना है कि कुत्तों में कैंसर के मामले तेज़ी से सामने आ रहे हैं। सब ठीक हो जाते हैं ये कहना भी गलत है। कुत्तों के बीच कैंसर के मामले देश में तेजी से बढ़ रहे हैं। 2006-07 में आईवीआरआई में कुत्तों के कैंसर के 94 मामले दर्ज किए गए जो कि 2016-17 में यह संख्या बढ़कर 209 हो गई।
आईवीआरआई के प्रमुख वैज्ञानिक एके शर्मा कहते हैं कि कुत्तों में कैंसर का एकमात्र लक्षण नोडल (शरीर में सूजन या गाँठ पड़ना) की उपस्थिति है। पालतू मालिकों के बीच कुत्तों की बीमारियां को लेकर जागरूकता बढ़ गई है। नोडल एक ट्यूमर में बदल जाता है, जो शरीर के अन्य हिस्सों में विकसित हो जाता है या फैलता है।
पशु चिकित्सक अनुपम श्रीवास्तव ने कहा अधिकतर डॉग लवर अपने पेट्स को लेकर पशु चिकित्सकों के पास रेगुलर चेकअप के लिए आते हैं। दरअसल लोग ये मानने लगे हैं कि रेगुलर चेकअप से उनके पेट्स की लाइफ बढ़ सकती है। कई हद तक ये ठीक भी है क्यूंकि इंसानों की तरह, बेहतर जीवन के लिए कुत्तों में भी शुरुआती समय में बीमारियों का बीमारियों का सही इलाज हो सकता है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, कुत्तों के बीच सबसे आम प्रकार के कैंसर ट्रांसमिसीबल विकृति ट्यूमर (टीवीटी), स्तन ग्रंथि ट्यूमर (स्तन कैंसर), प्लीहा कैंसर, त्वचा कैंसर, लसीका कैंसर, गम ट्यूमर (एपुलिस कैंसर) और नेत्र कैंसर है। वैज्ञानिकों का कहना है कि टीटीटी कैंसर के अन्य से अलग है क्योंकि एक तो इसका इलाज आसानी से हो सकता है और दूसरा ये एक से दूसरे में मेटिंग के दौरान फैलता है।
Published on:
24 Dec 2017 04:41 pm
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