
#OnceUponATime: लखनऊ के इस नवाब से जुड़ा है छतर मंजिल का इतिहास, लोगों के मन को मोह लेती थी सुंदरता
लखनऊ के नाम से जिस सभ्यता को जोड़ा जाता है उसमें आर्यों का जीवन दर्शन भी है अवध की लोक संस्कृति का भी रंग है शैखों की शेख़ी भी है। नवाबों की नरमी ,सिपाहियों की तलवार और पायल की झंकार भी मौजूद है वरिष्ठ साहित्यकार योगेश प्रवीण ने कहाकि इन सब को अगर एक शिष्टाचार के रूप में समेट लिया जाए तो उसे ही 'लखनवी तहजीब' कहलाएगी। उन्होंने बतायाकि गोमती नदी के दोनों तटों पर दूर-दूर तक बिखरे हुए लखनऊ के पुराने खंडहरों में शाही इमारतों के निराले वास्तु विन्यास में आपसी मेल मिलाप की जबरदस्त छाप देखने को मिलती है। उसी दौर की प्यारी खुशबू अवध की मिट्टी की महक बन गई हैं।
छतर मंजिल लखनऊ का एक ऐतिहासिक ईमारत है। इसके निर्माण का प्रारंभ नवाब ग़ाज़ीउद्दीन हैदर ने किया और उनकी मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारी नवाब नासिरुद्दीन हैदर ने इसको पूरा करवाया। इस दुमंज़िली इमारत का मुख्य कक्ष दुमंज़िली ऊँचाई का है और उसके ऊपर एक विशाल सुनहरी छतरी है जो दूर से देखी जा सकती है।
इतने खूबसूरत ईमारत आज अपनी पहचान खोती जा रही हैं। छतर मंजिल भवन के अंदर जैसे ही आप प्रवेश करेंगे आपको चारो तरह सन्नाटा और उदासी की झलक देखने को मिलेगी।
Published on:
02 Oct 2019 04:14 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
