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चौधरी चरण सिंह जयंती: जब चरण सिंह के CM कोटे से रिश्तेदार ने चुपचाप बुक करा लिया स्कूटर

ये वो दौर था जब स्कूटर लेना कोई आसान काम नहीं था, बड़ी-बड़ी सिफारिशें चला करती थीं।

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लखनऊ

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Rizwan Pundeer

Dec 23, 2022

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पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की आज 120वीं जयंती हैं। तमाम बड़े पदों पर रहे, कई सरकारों को गिराने और बनाने वाले चरण सिंह के बारे में एक बात मशहूर है कि वो उसूलों के बहुत पक्के थे। चरण सिंह राजनीति ही नहीं निजी जिंदगी में भी छोटी-छोटी बातों का बहुत ध्यान रखते थे। ऐसा ही एक किस्सा उनके रिश्तेदार के उनके सीएम कोटे से स्कूटर बुक करा लेने का है।

नाती ने इंटरव्यू में बताया था स्कूटर का ये किस्सा
चौधरी चरण सिंह के नाती हर्ष सिंह लोहित ने कुछ साल पहले एक इंटरव्यू बीबीसी को दिया था। उसमें उन्होंने अपने मौसाजी वासुदेव सिंह का एक किस्सा सुनाया था।

फिलहाल विदेश में रह रहे वासुदेव सिंह के बारे में हर्ष लोहित ने बताया, "उन दिनों वासुदेव सिंह दिल्ली में काम करते थे। वो स्कूटर लेना चाहते थे। तब स्कूटर लेना बड़ा मुश्किल काम था। उन्होंने एक तरकीब सोची और चौधरी साहब के पीए से मिल कर लखनऊ में अपने नाम स्कूटर बुक करा दिया।"

हर्ष ने आगे कहा, "वासुदेव मौसा जब स्कूटर की डिलीवरी लेने लखनऊ आए तो चरण सिंह को सारा माजरा पता चला। चौधरी चरण सिंह ने अपने पीए को बुलाया और पूछा कि जब ये दिल्ली के रहने वाले हैं तो इनको स्कूटर बुक कराना ठीक नहीं है। आप तुरंत स्कूटर की बुकिंग कैंसिल करिए और इनके पैसे वापस दिलवाइए।"


चरण सिंह कांग्रेस छोड़ते हुए रोने लगे थे
चौधरी चरण सिंह 1937 में पहली बार छपरौली से विधायक बने थे। तीन दशक तक तो वो कांग्रेस में विधायक, मंत्री और दूसरे पदों पर रहे। 1967 में उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था।

अप्रैल, 1967 को उन्होंने कांग्रेस छोड़ने के बाद पहला भाषण दिया तो वो रोने लगे थे। उन्होंने कहा था कि करीब 4 दशक इस पार्टी में हो गए, इससे अलग होना मुझे तकलीफ दे रहा है। चरण सिंह को उस समय कवर करने वाले पत्रकार कुरबान अली ने चरण सिंह पर लिखे एक लेख में इसका जिक्र किया है।

यह भी पढ़ें: चौधरी चरण सिंह के 3 किस्से, जो उनको समझने के लिए काफी हैं

कांग्रेस से अलग होकर बनाया था भारतीय क्रान्ति दल
चरण सिंह ने कांग्रेस से अलग होने के बाद अपनी पार्टी, भारतीय क्रांति दल का गठन किया था। चरण सिंह को ही उत्तर प्रदेश में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनाने का श्रेय जाता है। वो पहली बार अप्रैल, 1967 में सीएम बने। 1968 में उनकी सरकार चली गई। 1970 में फिर वो सीएम बने। हालांकि इस बार भी वो एक साल से कम ही सीएम रहे।

गृहमंत्री रहते इंदिरा गांधी को करा दिया था गिरफ्तार

इमरजेंसी के बाद चरण सिंह ने केंद्र की राजनीति का रुख किया। 1977 में बनी सरकार में वो गृहमंत्री बने। गृहमंत्री रहते इंदिरा गांधी को गिरफ्तार कराने के लिए भी वो खूब चर्चा में रहे। 1979 में वो मौका आया जब चौधरी चरण सिंह देश के पांचवें पीएम बने। चौधरी चरण सिंह 28 जुलाई 1979 से 14 जनवरी 1980 तक प्रधानमंत्री के पद पर रहे।

84 साल की उम्र में 29 मई 1987 को वो दुनिया को अलविदा कह गए। चरण सिंह के बाद उनके बेटे अजित सिंह ने उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। अजित सिंह देश की कई सरकारों में मंत्री रहे। अजित सिंह के निधन के बाद उनके बेटे यानी चरण सिंह के पोते जयंत चौधरी राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष हैं। वो राज्यसभा के सांसद भी हैं।