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अखिलेश की जनसुनवाई सुविधा की खुली पोल, जब लेखपाल की जगह दिया दुकानदार का नंबर

यह पोर्टल मुख्यमंत्री आॅफिस से संचालित होगा और मुख्यमंत्री के सचिव या विशेष सचिव स्तर के अधिकारी इसकी देख रेख करेंगे।

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Prashant Mishra

Jul 11, 2016

लखनऊ। अखिलेश ने बीते दिनों प्रदेश की जनता के लिए एक खास सुविधा जनसुनवाई पोर्टल का शुभारंभ किया था। जिसके तहत ये वादा किया गया था कि इस इस ऑनलाइन शिकायत पोर्टल की सहायता से अब पीड़ितों को अपनी समस्याओं से निपटने के लिए अधिकारियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यूपी की जनता इस जन सुनवाई पोर्टल के माध्यम से सीधे यूपी सीएम तक अपनी शिकायतें व सुझाव पहुंचा सकेगी। साथ ही ये बताया गया था कि यह पोर्टल मुख्यमंत्री आॅफिस से संचालित होगा और मुख्यमंत्री के सचिव या विशेष सचिव स्तर के अधिकारी इसकी देख रेख करेंगे। इस पर रजिस्टर होने वाली शिकायतों के निपटारे के लिए एक निश्चित समयसीमा तय होगी। साथ ही शिकायतकर्ता फीडबैक भी दे सकेगा।

इस पेपरलेस सिस्टम से महीनों तक सचिवालय में इस विभाग से उस विभाग तक जाने के समय में बचत होगी। इस घोषणा के बाद यूपी की जनता में खुशी की लहर दौड़ गई और लोगों ने सोचा कि अब उनकी बात सीधे अखिलेश तक पहुंचे की लेकिन इस सुविधा की पोल तब खुल गई जब पिछले दिनों एक किसान ने अपनी जमीन पर पुलिस द्वारा अवैध कब्जा किए जाने के विरोध में शिकायत दर्ज कराई। पोर्टल पर शिकायत तो आसानी से रजिस्टर हो गई साथ ही शिकायत नंबर भी मिल गया। जिसके बाद फोन पर मैसेज भी आ गया कि आपकी शिकायत को सबंधित अधिकारी को भेज दी गई है और और साथ में एक फोन नंबर भी दिया गया। जिसे क्षेत्र के लेखपाल का नंबर बताते हुए किसान को ये निर्देश दिया गया कि सुविधा के लिए क्षेत्र के लेखपाल से इस फोन पर संपर्क कर सकते हैं। इस मैसेज और पोर्टल की सर्विस को देख के किसान को काफी राहत मिली। लेकिन जब किसान ने वो नंबर मिलाया तो पता चला कि वो नंबर किसी दुकानदार का है जो जिला बस्ती का रहने वाला है। पत्रिका ने जब किसान के आरोपों की जांच करने के लिए उस नंबर पर फोन किया व बात की तो फोन पर बात करने वाले ने बताया कि ये लेखपाल का नंबर नहीं है और वे पिछले लगभग आठ साल से इस नंबर का इस्तेमाल कर रहा है। अब किसान के पास समस्या ये है कि वो जाए भी तो जाए कहां उसे सहारा था कि यदि सीएम साहब उसकी शिकायत को संज्ञान में लेते तो उसकी बारह बिगहे जमीन जिसपे अटरिया थाने ने कब्जा कर रखा है। उसे वापस मिल जाती।

ये है पूरा मामला


अटिरया के रहने वाले रविन्द्र कुमार का कहना है कि अटरिया थाना जिस जमीन पर बना है ठीक उसके पड़ोस में मेरी जमीन है जिसपे पुलिस ने अवेध कब्जा कर रखा है। और पुलिस लगातार जमीन पर अतिक्रमण करते ही जा रही है। पिड़ित का कहना है कि वो पिछले लंबे समय से पुलिस व प्रशासन के चक्कर लगा रहा है लेकिन उसे मदद की जगर सबंधित अधिकारियों को तीखी बातों का शिकार होना पड़ रहा है।

पुलिस से पीड़ित की बाहर बिगहे मतलब की लगभग एक लाख आठ हजार जमीन पर अतिक्रमण कर रखा है। जानकारी के लिए बता दें कि पुलिस को थाना बनाने के लिए जो जमीन दी गई है उसका गाटा संख्या 516 और किसान की जमीन का गाटा संख्या 517। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार अटरिया थाने का निर्माण पुलिस ने सन 1992 में आस-पास हुआ था। जिसके बाद से पुलिस लगातार दबंगई दिखाते हुए और बिना किसान की जानकारी दिए पास में पड़ी जमीन पर अवैध कब्जा कर रही है। किसान पुलिस द्वारा इस तरह से उसकी जमीन पर कब्जा किए जाने की शिकाय क्षेत्र के एसपी से लेकर डीएम तक की लेकिन कहीं से कोई राहत नहीं मिली। जिसके बाद किसान ने तहसील दिवस पर भी लिखित शिकायत की जिसके जवाब में एक पत्र मिला जिसमें ये तो स्विकारा गया कि अटरिया थाना गाटा संख्या 517 की जमीन का कुछ भाग उपयोग में ले रही है लिकिन लेकिन इसपे कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। अब किसान इस जमीन पर निर्माण कार्य कराना चाहता है लेकिन पुलिस का विरोध सहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।


क्या कहते हैं अधिकारी

जब पत्रिका ने इम मामले की जानकारी के लिए डीएम सीतापुर के फोन फोन नंबर- 9454417560 पर फोन मिलाता तो डीएम साहब का फोन ही नहीं उठा।

वहीं पत्रिका से बात-चीत में एसडीएम सधौली मामले के बारे में जानकारी देते हुए बची उन्हों कहा कि थाना तो काफी पुराना बना हुआ है अगर ऐसा कुछ है तो पहले मैं मामले की जांच करा लेती हूं। जब कि किसान इस मामले की शिकायत तहसील दिवस पर कर चुका है जिसका जबाव भी किसान के पास है। सरकारी अधिकारियों के इन्ही रवैये से किसान पिछले लंबे समय से भटक रहा है। और किसान का जमीन पर निर्मण कार्य का सपना सरकारी जांच की भेंट चढ़ रहा है।

वहीं एडिशनल एसपी ने पत्रिका से बात चीत में स्विकारा है कि अटरिया थाना पीड़ित की जमीन का कुछ हिस्सा उपयोग कर रहा है। और इस मुद्दे पर पहले भी किसान से बात चीत हो चुकी है जिसमें ये बात हुई थी कि पीड़ित की उपयोग की गई जमीन के बदले में दूसर जमीन दी जाएगी। अटरिया थाने के एसओ का कहना हे कि जमीन पर अतिक्रमण की जानकारी नहीं है।