
UP Politics: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि कोई ‘उप’ डबल हार के ‘उपहार’ के बाद भी डबल इंजन का प्रशंसा-प्रमाणपत्र बांट रहे हैं। अगर माननीय सही काम कर रहे होते तो दो ‘उप मुख्यमंत्री’ की क्या जरूरत पड़ती। इसका मतलब या तो वो सही काम नहीं कर रहे हैं या फिर बाकी दो बेकाम हैं, नाकाम हैं, और उनका काम दरबारी चारण की तरह करना बस स्तुतिगान है। अगर उप सच में उपयोगी होते, तो दिल्ली के मंडल में भी होने चाहिए थे, परंतु हैं नहीं। इसका जवाब देंगे ‘उप’ या रहेंगे ‘चुप’?
सपा मुखिया और उपमुख्यमंत्री के बीच चल रहे वाक युद्ध में अब कांग्रेस भी कूद गई है। कांग्रेस के प्रवक्ता अंशू अवस्थी का कहना है कि यह पहली बार नहीं जब उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पिछड़ों के हितों और उनके अधिकारों से समझौता कर सरेंडर किया है। इससे पहले भी तमाम बार उनको अपमानित किया गया स्टूल पर बिठाया गया, न जाने क्या-क्या कहा गया ? लेकिन हर बार वह पिछड़ों के हक और अधिकारों को सरकार के सामने योगी आदित्यनाथ के सामने सरेंडर करते रहे, इससे भाजपा में पिछड़ों की हालत और हो रहे अपमान का पता चलता है।
इसके पहले उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बंगाल में हुए दुष्कर्म मामले में सपा मुखिया को घेरा था। उन्होंने कहा था कि दीदी ममता बनर्जी के बचाव में निर्ममतापूर्वक दलील देने वाले राहुल गांधी के दरबारी अखिलेश यादव पूरी तरह बलात्कारियों के पैरोकार हो गए हैं। उन्होंने लड़कों से गलती हो जाती है की यादें ताज़ा कर दिया है।
उन्हें राजनीति छोड़ बलात्कारियों का वकील बन जाना चाहिए। अखिलेश यादव जी जब 2012 से 2017 तक आप मुख्यमंत्री थे जो दुर्दशा उत्तर प्रदेश की थी, वही बदतर हाल पश्चिम बंगाल में टीएमसी की ममता बनर्जी जी की सरकार ने कर दिया है। यही समय है, सही समय है, सपा मुक्त यूपी, टीएमसी मुक्त पश्चिम बंगाल।
Published on:
19 Aug 2024 05:29 pm

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