
कांग्रेस में जतिन प्रसाद की छुट्टी, राज बब्बर ही रहेंगे अध्यक्ष
लखनऊ . कांग्रेस नेतृत्व में बदलाव की संभावना खत्म। मिशन -2019 के मद्देनजर गठबंधन से दूरी बनाने वाली कांग्रेस पार्टी ने राज बब्बर की अगुवाई में चुनाव लडऩे का फैसला किया है। इसी के साथ पार्टी ने प्रदेश की 70 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। शेष 10 सीटों को चुनिंदा बड़े विपक्षी नेताओं के लिए छोड़ दिया जाएगा। पार्टी ने जुलाई के पहले पखवारे में संभावित उम्मीदवारों के नाम जिला इकाइयों में मांगे हैं। यूपी में राज बब्बर का राज कायम करने का फैसला स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने किया है। इसी फैसले के बाद दो दिन पूर्व यूपी कांग्रेस के तीन बड़े संगठनों को प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने भंग कर दिया था। पार्टी की इस सख्त कार्रवाई से तीन सौ से ज्यादा नेता पैदल हो गए हैं। पार्टी ने यह कार्रवाई मिशन 2019 के मद्देनजर करते हुए निष्क्रिय नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया है। जल्द ही संगठन में नए और जोशीले कार्यकर्ताओं को समायोजित किया जाएगा। राज बब्बर जल्द ही प्रदेश की तमाम जिला इकाइयों का भी पुनर्गठन करने वाले हैं। इस प्रशासनिक कार्रवाई से यह पुख्ता हो गया था है कि लोकसभा चुनाव राज बब्बर के नेतृत्व में होगा।
गठबंधन की संभावना खत्म होते ही जतिन का पत्ता कटा
सपा-बसपा के साथ गठबंधन की स्थिति में कांग्रेस को प्रदेश अध्यक्ष के लिए किसी दूसरे चेहरे की दरकार थी। कारण यहकि राज बब्बर के साथ सपा मुखिया अखिलेश यादव के संबंध बेहतर नहीं हैं। ऐसे में राज बब्बर के विकल्प के रूप में पार्टी ने पहले प्रमोद तिवारी के नाम पर विचार किया, लेकिन बाद में जतिन प्रसाद अथवा आरपीएन सिंह के नाम पर सहमति बन गई थी। ज्यादा उम्मीदें जतिन प्रसाद के पक्ष में थीं, क्योंकि पार्टी यूपी में सवर्ण वोटों को बटोरने के लिए किसी ब्राह्मण चेहरे को आगे करना चाहती थी। महागठबंधन में कांग्रेस के हिस्से में सिर्फ दस सीट की नौबत देखकर पार्टी ने अकेले दम पर चुनाव लडऩे का फैसला किया है। ऐसे में पार्टी की यकीन है कि बतौर प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर ज्यादा फायदेमंद रहेंगे। कानपुर के कांग्रेस अध्यक्ष हरप्रकाश अग्निहोत्री के मुताबिक, पार्टी ने यूपी की सभी सीटों पर दमदार उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। उम्मीदवारों के नाम पर स्क्रीनिंग कमेटी विचार करने के बाद पांच नाम के पैनल भेजेगी, अंतिम नाम आलाकमान ही तय करेगा।
जल्द ही संगठन का होगा पुनर्गठन, नेताओं में मचा हडक़ंप
लोकसभा चुनाव - 2019 के लिए कांग्रेस ने यूपी के सियासी मोर्चे को दुरुस्त करना शुरू कर दिया है। इसी नाते पार्टी को मजबूती देने के लिए नीचे से लेकर ऊपर तक बदलाव की प्रक्रिया जारी है। इसी सिलसिले में यूपी कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने बुधवार को संगठन की तीन इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। खबर है कि प्रदेश संगठन को सुसंगठित करने के उद्देश्य से संगठन विभाग, वित्त विभाग और प्रशासनिक विभाग को भंग किया गया है। जल्द ही इन विभागों का पुनर्गठन होगा। पार्टी अध्यक्ष की इस कार्रवाई से नेताओं में हडक़ंप मच गया है। पार्टी ने प्रदेश इकाई के जिन तीन विभागों को भंग किया गया है, उसके पदाधिकारी कई साल से जमे थे और अधिकतर निष्क्रिय थे, इसी कारण उन पर कार्रवाई हुई है।
प्रदेश में अकेले लडऩे की संभावना टटोल रही है कांग्रेस
गौरतलब है कि सपा-बसपा गठबंधन में सम्मानजनक स्थिति नहीं मिलने की नौबत आते देखकर कांग्रेस ने यूपी में लोकसभा चुनाव के दौरान सभी 70 सीटों पर चुनाव लडऩे का मूड बनाया है। पार्टी को डर है कि गठबंधन की स्थिति में पार्टी को सिर्फ दस-बारह सीट मिलती हैं तो समूचे प्रदेश में पार्टी का आधार खत्म हो जाएगा। यूपी की सियासत में कमजोर और सपा की अनदेखी की शिकार कांग्रेस मायावती से रिश्ते जोडक़र अपना वजूद मजबूत करना चाहती थी, लेकिन बसपा प्रमुख भी राजनीतिक मजबूरी के कारण यूपी में कांग्रेस को ज्यादा सीट दिलाने की स्थिति में नहीं हैं। इसी कारण कांग्रेस ने यूपी में अकेले दम पर चुनाव लडऩे का इरादा बनाया है। पार्टी को यकीन है कि अकेले लडऩे पर यूपी में भाजपा विरोधी लहर के चलते उसे 18-20 सीट मिल जाएंगी, जबकि गठबंधन में शामिल होने पर कांग्रेस को बमुश्किल 15 सीट हाथ लगेंगी, ऐसे में नुकसान ज्यादा होगा।
Published on:
21 Jun 2018, 8:33 AM IST
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