11 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

ANIL YADAV का विवादों से रहा है पुराना नाता, DEGREE पर भी उठे थे सवाल

यूपीपीसीएस अध्यक्ष के रूप में अनिल यादव ने दो अप्रैल 2013 को कार्यभार संभाला था। इसके बाद से उनके कार्यकाल में दो परीक्षाओं के रिजल्ट संशोधित हो चुके हैं।

2 min read
Google source verification

image

up online

Oct 14, 2015

uppsc

anil yadav

लखनऊ.
कोर्ट के आदेश के बाद यूपीपीएससी से हटाए गए अध्यक्ष अनिल कुमार यादव का विवादों से काफी पुराना नाता रहा है। वे खुद भी डिग्री के विवाद में घिर चुके हैं। यह सवाल उठाया गया था कि स्थाई अध्यापक होने के बावजूद उन्होंने लॉ में ग्रेजुएशन और पीएचडी की डिग्री कैसे हासिल कर ली? इलाहाबाद हाईकार्ट में इस मामले में याचिका भी दाखिल हुई थी। वहीं, हाईकोर्ट द्वारा अनिल यादव की नियुक्ति रद्द होने से प्रतियोगी छात्रों में खुशी का माहौल है। वे ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मना रहे हैं।


ये भी पढ़े: UPPSC चेयरमैन अनिल यादव की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने बताया अवैध


प्रतियोगी छात्र समिति के अनुसार, अनिल यादव के हलफनामे में उनकी शैक्षिक योग्यता का पूरा ब्यौरा दिया गया है। इसमें लिखा है कि साल 1986-88 के बीच वह अलग-अलग विषय़ों पर स्पेशलाइजेशन हासिल करते रहे। साथ ही कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर टीचर भी रहे। इसी दौरान उन्होंने लॉ में ग्रेजुएशन और पीएचडी की डिग्री हासिल की। उनकी सारी डिग्री आगरा यूनिवर्सिटी की हैं।


ये भी पढ़े: अनिल यादव मामले में विपक्ष ने सरकार को घेरा, जानें किसने क्या कहा


सवाल यह खड़ा किया गया था कि साल 1997 से 2002 के बीच मैनपुरी में टीचर रहते हुए आगरा यूनिवर्सिटी से एलएलएम, डीएससी और पीएचडी की डिग्री कैसे हासिल की? उन्होंने यह भी छिपाया है कि किस साल में उन्होंने हाईस्कूल और इंटर पास किया है।


2013 में संभाला था कार्यभार

आयोग के अध्यक्ष के रूप में अनिल यादव ने दो अप्रैल 2013 को कार्यभार संभाला था। इसके बाद से उनके कार्यकाल में दो परीक्षाओं के रिजल्ट संशोधित हो चुके हैं। पीसीएस-2011 की मेन एग्जाम को लेकर आयोग को अपना परिणाम बदलना पड़ा था। इसके पहले त्रिस्तरीय आरक्षण के आधार पर घोषित किए गए थे। बाद में हाईकोर्ट में इसे अवैध ठहराए जाने के बाद नए सिरे से रिजल्ट घोषित किए गए। पीसीएस जे-2013 की परीक्षा में गलत सवालों की वजह से आयोग को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।


गौरतलब है कि यूपी लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा 29 मार्च को होनी थी। छात्र रविवार को अपने परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा देने भी पहुंच चुके थे, लेकिन परीक्षा के समय ही सूचना आई कि यूपीपीसीएस परीक्षा का पर्चा लीक हो गया है। छात्र इस बात से काफी उग्र हो गए। उन्होंने लोक सेवा आयोग के सामने हंगामा किया। आखिरकार शाम होते-होते परीक्षा रद्द करने की घोषणा कर दी गई।


यूपीपीएससी के अध्यक्ष अनिल यादव को हाईकोर्ट के आदेश के बाद हटा दिया गया
है। इसके साथ इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के प्रतियोगी छात्र अविनाश पांडेय का
संघर्ष पूरा हो गया। उन्होंने 10 मई 2014
को
आरटीआई दाखिल करके अनिल यादव की नियुक्ति के संबंध में जानकारी मांगी थी।
उनका आरोप था कि अनिल यादव ने अपने कार्यकाल में 236 सीधी भर्ती चार लोवर
पी.सी.एस भर्ती अवैध तरीके से की।


कौन हैं अनिल यादव

यूपी लोकसेवा आयोग में आने से पहले अनिल यादव किसी कॉलेज में लेक्चरार थे। इसके बाद वे मैनपुरी के एक स्कूल के प्रिसिंपल बने। बताते चलें कि यूपीएससी अध्यक्ष बनने के लिए 83 लोगों ने आवेदन किया था। इसमें 8 आईएएस, 20 से ज्यादा पीसीएस, 22 प्रोफेसर थे। इन 83 आवेदनकर्ताओं में अनिल यादव का नाम 83 यानि आखरी नंबर पर था। सवाल तभी उठे थे कि अखिलेश सरकार ने आईएएस, पीसीएस और प्रोफेसर की जगह अध्यक्ष की कुर्सी के लिए एक स्कूल प्रिसिंपल अनिल यादव को क्यों नियुक्त किया गया।