
लखनऊ नगर निगम कार्यालय।
लखनऊ नगर निगम में करोड़ों के भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने बताया कि अपर नगर आयुक्त ललित कुमार के कार्यकाल के दौरान मुफ्त में 5.5 करोड़ की सरकारी जमीन बिल्डर को दे दी गई। बिल्डर को जमीन मिलते ही नगर निगम से फाइल भी गायब हो गई। साथ ही लगे हाथ मनमाने तरीके से बिल्डरों को एनओसी भी दे दी गई। नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने बताया कि मामले की जानकारी मिलते ही अपर नगर आयुक्त ललित कुमार से सम्पत्ति विभाग ले लिया गया। अब यह जिम्मेदारी अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव को दी गई है।
नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने बताया "नगर निगम के प्रावधान के अनुसार जब किसी को नगर निगम की जमीन दी जाती है तो उसके बदले में बराबर की कीमत की जमीन वापस ली जाती है। आईआईएम रोड पर मुताककीपुर में 10 हजार स्क्वायर फीट नगर निगम और लगभग 5 स्क्वायर फीट सिंचाई विभाग की जमीन पर संप्रिंग गार्डन सोसायटी ने कब्जा कर रखा है। नलकूप सिंचाई विभाग की पानी की टंकी को तोड़कर कब्जा किए जाने पर नलकूप सिंचाई विभाग ने मड़ियांव थाने में संप्रिंग गार्डन सोसाइटी पर मुकदमा दर्ज कराया है।"
उन्होंने बताया कि लखनऊ नगर निगम में करीब 50 या फिर नए सिरे से उनका रैनोवेशन कर दिया गया है। अब नगर निगम ने इन घरों को चिन्हित किया है। इनका हाउस टैक्स नए सिरे से बनेगा। ऐसे में अगर आपने अपना पुराना घर तोड़कर उसका नए तरीके से रैनोवेशन किया है तो खुद नए सिरे से गृहकर निर्धारण करा लें। नगर निगम अगर ऐसा करेगा जुर्माना भी लगाएगा। दरअसल, पिछले वित्तीय वर्ष में सभी दावों के बाद भी करीब 2 लाख 50 हजार से ज्यादा लोगों का हाउस टैक्स जमा नहीं हुआ।
नगर आयुक्त के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में नगर निगम ने रिकॉर्ड हाउस टैक्स वसूली जरूर की, लेकिन उसके बाद भी करीब 150 करोड़ रुपए बकाया रह गया। अब पता चला है कि जिन 2.50 लाख लोगों ने हाउस टैक्स नहीं दिया है, उनमें करीब 50 हजार घर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं या फिर उनको तोड़कर नया निर्माण हो गया है। इसमें ज्यादातर कमर्शियल निर्माण शामिल हैं, लेकिन अभी भी पुराने के हिसाब से हाउस टैक्स आ रहा है। ऐसे में नगर निगम अब हाउस टैक्स बनाने के लिए सभी घरों को चिह्नित कर नोटिस देने की तैयारी कर रहा है।
Published on:
08 Apr 2024 10:44 am
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