
कानपुर. कहते हैं देर पर अंधेर नहीं। अगर इंसाफ पाने के लिए लड़ाई इमानदारी से लड़ी जा तो कामयाबी जरूर मिलती है। आचार्यनगर निवासी सत्यभूषण अब्बी 24 साल तक निडर होकर डटे रहे और अपने छोटे भाई के इलाज में लापरवाही बरतने वाले कानपुर के मशहूर डॉक्टर राजन लूथरा को सजा दिलवा कर दम लिया। उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल ने डॉक्टर लूथरा को दोषी मानते हुए उनका मेडिकल सार्टिफिकेट छह माह तक के लिए निलंबित कर दिया। अब डॉक्टर लूथरा किसी भी मरीज का इलाज नहीं कर पाएंगे।
क्या था पूरा मामला
आचार्यनगर निवासी कुलभूषण अब्बी का 1993 में एक्सीडेंट हुआ था। ट्रांसपोर्ट मालिक ने उन्हें केएमसी नर्सिंग होम में भर्ती कराया। कुलभूषण का इलाज शहर के मशहूर सर्जन डॉक्टर राजन लूथरा कर रहे थे। आरोप है कि इलाज के दौरान डॉक्टर लूथरा ने मरीज के प्रति लापरवाही बरती जिससे उनकी मौत हो गयी। 1994 में कुलभूषण के भाई सत्यभूषण अब्बी ने जिला उपभोक्ता फोरम में मुक़दमा दर्ज करवाया था। उपभोक्ता फोरम में डॉक्टर राजन लूथरा पर लगाया गया लापरवाही का आरोप सही पाया गया और उन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया। मृतक के भाई सत्यभूषण अब्बी ने बताया कि कुलभूषण को डॉक्टर लूथरा ने 12 सितम्बर 1993 को कुलभूषण को जब कानपुर मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया था तब उनके पेट, चेस्ट, आंख और मुह पर गंभीर इंजरी थी। डॉ लूथरा ने कूलभूषण का कोई मेडिकल टेस्ट कराया ऑपरेशन कर दिया, जिसके चलते उनकी मौत हो गयी थी।
उपभोक्ता फोरम ने पाया था दोषी
मृतक के भाई सत्यभूषण अब्बी ने बताया कि उस दौरान हमने डॉक्टर की लापरवाही की शिकायत लेकर पुलिस के पास गए, लेकिन सुनवाई नहीं होने के चलते हमें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उपभोक्ता फोरम में हम मामले को लेकर गए, जहां कोर्ट ने डॉक्टर लूथरा को दोषी पाया और इन पर पांच लाख का जुर्माना लगाया। राज्य उपभोक्ता फोरम ने भी डॉक्टर राजन लूथरा के खिलाफ फैसला सुनाया। एक साल पहले डॉ राजन ने कुलभूषण के परिजनों को पांच लाख रुपए की क्षतिपूर्ति दी। इसे आधार बनाते हुए मृतक की पत्नी आशा ने यूपी मेडिकल काउंसिल नें प्रार्थनापत्र देकर कहा कि डॉ राजन ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए मुआवजा दिया है। इसलिए वह दोषी हैं, उनकी मान्यता रद्द की जाए। उनकी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की मांग की गई।
आयोग में पाया दोषी, सजा सुना दी
डॉक्टर राजन लूथरा की लापरवाही का मामला र उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल क समक्ष पहुंचा था। पीड़ित पक्ष ने यहां अपनी जारेदार दलील देकर पूरे प्रकरण की जांच करवाने की मांग रखी। उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल ने जांच की जिसमें डॉ लूथरा सर्जन के रूप में रजिस्टर्ड नहीं थे। उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल की गवर्निंग बाड़ी ने अपनी जांच में यह भी पाया की डॉ लूथरा और मरीज व तीमारदारों के बीच सवेंदनहीनता रही और डॉ लूथरा मरीज की स्थिति समझने में नाकाम रहे इसलिए छह महीने के लिए उनकी प्रैक्टिस पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगा दिया गया है। उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल की गवर्निंग बाड़ी ने डॉक्टर लूथरा को पूरे छह माह तक किसी भी मरीज का इलाज नहीं करने पर रोक लगाई है। डॉक्टर लूथरा इस दौरान अगर प्रैक्टिस करते हुए पाए गए तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी।
एमसीआई के सामने रखूंगा अपना पक्ष
कुलभूषण की पत्नी आशा का आरोप है कि सर्जन डॉ राजन लूथरा ने उनके पति का स्वास्थ्य परीक्षण नहीं किया और ऑपरेशन कर दिया। जहां हालत बिगड़ने के बाहर निकलने के बाद उनकी मृत्यु हो गई। इस बारे में बात करते हुए डॉ राजन लूथरा ने कहा कि, कुलभूषण को मैने देखा था। उनका छोटा भाई डॉक्टर है। उसने कहा था जब तक वो ना आ जाए, ऑपरेशन ना करें। इसलिए ऑपरेशन नहीं किया। उन्होंने आकर मरीज का ऑपरेशन डॉ वीएस राजपूत से कराया। ऑपरेशन के बाद मरीज की मौत हो गई थी। यूपी मेडिकल काउंसिल ने मेरा पक्ष ठीक से नहीं सुना, अब मैं एमसीआई के सामने अपना पक्ष रखूंगा। वहीं आदेश पर अमल कराने के लिए इसकी कापी जलाधिकारी सुरेंद्र सिंह, एसएसपी अखिलेस कुमार, सीएमओ डॉ अशोक शुक्ला, डॉ राजन लूथरा और आशा सभी को भेजी गई है।
Updated on:
12 Dec 2017 07:47 am
Published on:
12 Dec 2017 07:45 am

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