
लखनऊ. देश का प्रमुख इस्लामी शिक्षण संस्थान दारूल उलूम देवबंद ने बैंक को लेकर अजब सा फतवा जारी किया है। उन्होंने मुस्लिम लड़कियों को बैंक कर्मियों के परिवार में शादी न करने का फतवा जारी किया है। उन्हें लगता है कि बैंक कर्मियों का पैसा बेकार होता है।
न करें बैंक कर्मियों के घर में शादी
दारूल उलूम ने यह फतवा तब जारी किया था, जब उनसे किसी ने यह पूछ डाला था कि उन्हें कई ऐसे रिश्ते आ रहे हैं, जिनके पिता बैंक कर्मी हों। बैंकिग सूत्र पूरी तरह से ब्याज पर आधारित हैं, जिसे इस्लाम में बेकार बताय़ा गया है। तो क्या ऐसे परिवार में शादी करनी चाहिए?
बैंक कर्मियों से अच्छे दूसरे व्यवसाय के घर में हो शादी
इस सवाल पर फतवा जारी कर दारूल उलूम ने कहा कि जहां बैंक कर्मी हों, उस घर मेंं शादी नहीं करनी चाहिए। इससे अच्छा होगा किसा और नेक घर में रिश्ता किया जाए। दारूल उलूम का यह बयान मुस्लिम समाज को और अंधेरे में धकेल रहा है। उनका यहा बयान इस बात का इशारा कर रहा है कि वह मुस्लिम समाज को अंधेरे में रखना चाहते हैं।
बुर्के पर भी आपत्ति जताई
वैसे ये कोई पहली बार नहीं है जब दारूल उलूम ने ऐसा कोई हैरान करने वाला फतवा जारी किया हो। इससे पहले भी उन्होंने कई गैर जरूरी फतवे जारी किए हैं। गीता का पाठ करने वाली छात्रा पर फतवा जारी करना हो या डिजाईनर और स्लिम फिट बुरका पहनने की बात पर फतवा जारी करना हो, उन्होेने कई बार कुछ ऐसे फतवे जारी किए हैं, जो बिना किसी मतलब के हो। दारूल उलूम ने अपने फतवे में मुस्लिम महिलाओं के चमक-दमक वाले बुर्का पहनने को गुनाह बताया है। मुफ्तियों का कहना है कि पर्दे के नाम पर ऐसा बुर्का पहनकर घर से निकलना जायज नहीं है, जिसकी वजह से कुछ लोगों की बुरी नजरें उन पर अड़ी रहती हैं।
न हो खिलवाड़ इसलिए लिया ये फैसला
दारुल उलूम से जारी फतवे को वक्त की जरूरत बताते हुए तंजीम अब्ना-ए-दारुल-उलूम के अध्यक्ष मुफ्ती यादे इलाही कासमी ने कहा कि पर्दे के नाम पर मुस्लिम महिलाएं खास तौर पर स्कूल कॉलेजों में जाने वाली लड़कियों द्वारा खिलवाड़ किया जा रहा है।
अकेले हज पर जाने से भी आपत्ति
आपको बता दें कि सरकार ने इस फैसले का ऐलान किया है कि अब मुस्लिम महिलाएं अकेले भी हज पर जा सकती हैं। इस बात आसोचना भी की गई। ऑनलाइन फतवा विभाग के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारूकी ने कहा कि औरतों का बिना मर्द के हज और उमरा पर जाना गलत है। फतवा विभाग ने कहा कि औरतों के साथ अगर बड़ी उम्र की औरत जाए तो जायज है।
सबका साथ-सबका विकास
मुस्लिम समाज के कुछ प्रतिनिधि संगठन शरीयत की गलत व्याख्या कर पूरे समाज को विकास के मार्ग से भटकाना चाहते है जबकि केन्द्र सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ‘सबका साथ-सबका विकास’ के मूलमंत्र पर चलकर सबको विकास से जोड़ रही है।
Published on:
05 Jan 2018 05:59 pm
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