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गूंगी बहरी लड़की के हाथ पैर बांधकर रेप, माँ ने सबूत मिटाने का बनाया था प्लान, फिर कोर्ट ने..

उत्तर प्रदेश में मानवता को शर्मसार करने वाले एक केस में फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिसमें फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय जज अभिषेक सिन्हा की अदालत ने लड़के को सज़ा सुनाई। बेबस लड़की के के ही रहने वाले एक लड़के ने सांप निकलने की झूठी कहानी बनाई। जिसके बाद कमरे में बेबस लड़की के हाथ पैर बांधकर दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था। इस मामले में बेटे के साथ माँ को सबूत मिटाने के आरोप में दोषी बनाया गया था, लेकिन सबूतों के अभाव में कोर्ट ने माँ को रिहा कर दिया।    

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लखनऊ

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Dinesh Mishra

Jul 22, 2022

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Protest Against Rapist symbolic photo

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिला फास्ट ट्रैक कोर्ट की ओर से गूंगी-बहरी युवती को हबस का शिकार बनाने के मामले में पिछले कई सालों से चल रही सुनवाई को पूरा कर लिया गया। जिसमें आरोपी सुहेश (काल्पनिक नाम) को दोषी करार दिया। फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट न्यायाधीश अभिषेक सिन्हा ने दोषी को 14 वर्ष के कारावास एवं 22 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। साल 2016 में दर्ज हुए इस केस में आरोपी को रेप केस में और उसकी मां को सबूत मिटाने के मामले में सज़ा सुनाई गई। लेकिन माँ को किसी प्रकार से दोषी नहीं पाया गया। इसलिए उसे रिहा कर दिया गया है।

अमेठी जिले की रहने वाली गूंगी-बहरी युवती के भाई ने अमेठी थाने में इसी थाना क्षेत्र स्थित के एक गाँव के रहने वाले आरोपी सुहेश व उसकी माँ के खिलाफ 11 फरवरी 2016 को मुकदमा दर्ज कराया गया। आरोप के मुताबिक घटना के दिन उसकी गूंगी-बहरी बहन घास छीलने गई थी, तभी पास के मकान में सुहेश ने सांप निकलने का बहाना बताकर उसे खुरपी देने का इशारा किया। खुरपी देने पीड़िता आई तो महेश ने उसे बहाने से कमरे में बुला लिया और उसे कमरे में बन्द कर दिया। महेश ने पीड़िता के हाथ-पैर बांधकर जबरन दुष्कर्म किया।

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आस-पास मौजूद लोगों ने घटना की जानकारी मिलने पर दरवाजा खुलवाने का बहुत प्रयास किया लेकिन महेश ने दरवाजा नही खोला, भीड़ ने किसी तरीके से दरवाजा खोला तो अंदर पीड़िता के हाथ-पैर बंधे मिले। आरोप के मुताबिक पकड़े जाने के बाद महेश व मौके पर पहुँची उसकी मां ने धमकी दी कि उनका कोई कुछ नहीं कर पायेगा। इस मामले में पीड़िता के भाई की तहरीर पर मां-बेटे के खिलाफ अमेठी कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ और दोनों के खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल हुआ।

Fast Track Court in Sultanpur

विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष के शासकीय अधिवक्ता संजय सिंह ने अपने साक्ष्यों व तर्को को प्रस्तुत कर आरोपियो को दोषी ठहराकर कड़ी सजा से दण्डित किये जाने की मांग की। वहीं बचाव पक्ष ने अपने तर्को को प्रस्तुत कर आरोपियों को निर्दोष साबित करने का भरसक प्रयास किया।

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एफटीसी जज अभिषेक सिन्हा की अदालत ने उभय पक्षो को सुनने के पश्चात मामले में आरोपी बनी महेश की मां को साक्ष्य के आभाव में बरी कर दिया है,वहीं आरोपी महेश को दोषी ठहराते हुए 14 वर्ष के कारावास एवं 22 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।

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