सत्र के दौरान संजय द्विवेदी ने बताया कि संस्कृत भाषा हमारी संस्कृति का महत्वपूर्ण अंश है।इसके ह्यास के कारण समाज में मानव मूल्यों में तेजी से गिरावट आ रही है। गुरु और शिष्य के बीच संवाद ख़त्म हो गया है। संजय ने बताया कि उन्होंने संस्कृत में परास्नातक और पीएचडी की है।पहले वह संस्कृत के गीतों का प्रयोग पारंपरिक संगीत के कार्यक्रमों में किया करते थे। जिसमें वह लोग ही भाग लेते थे जो बुद्धिजीवी, ज्ञानी और संस्कृत को समझने वाले होते थे। जिनकी संख्या बेहद कम होती है।ऐसे में संजय को ये आइडिया आया कि संस्कृत भाषा में इस तरह से गीतों को प्रस्तुत किया जाये। जो युवाओं के बीच रुचिकर हो और उनकी समझ में भी आए।