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District name change in Uttar Pradesh: यूपी में 75 जिले, राम के हिस्से छह तो कृष्ण के खाते में आए सिर्फ तीन

district name change in uttar pradesh. योगी आदित्यनाथ (Yogi Aditynath) इन दिनों यूपी के जिलों के नाम बदल रहे हैं। रामायण और महाभारत काल के नाम पर जिलों का नामकरण हो रहा है। लेकिन राम-कृष्ण की धरती पर भगवान के नाम पर सिर्फ 9 जिले ही हैं।

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Ram-Krishana Districts

Ram-Krishana Districts

लखनऊ.(महेंद्र प्रताप सिंह) यूपी में इन दिनों जिलों के नाम बदलने की राजनीति (District Name change in UP ) चल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi ) पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav ) ने आरोप लगाया है कि वह नाम बदलने की राजनीति कर रहे हैं। भाजपा (BJP ) का तर्क है वह पुराने गौरव को लौटाने का काम कर रही है। तीन जिलों का नाम बदलने के बाद अब छह और जिलों (District Name change in Uttar Pradesh ) के नाम को बदलने का प्रस्ताव तैयार है। कहा जा रहा है राम (Lord Ram) और कृष्ण (Lord Krishna) की धरती यूपी में उन्हीं के नाम पर ज्यादा से ज्यादा जिलों के नाम होने चाहिए। लेकिन, हकीकत तो कुछ और है। प्रदेश के 75 जिलों में अभी राम के हिस्से सिर्फ छह जिले आए हैं तो कृष्ण के खाते में महज तीन हैं। चौकिए नहीं यूपी में सिर्फ नौ नाम ही राम-कृष्ण के काल का प्रतिनिधित्व करते हैं। राम के नाम पर जहां रामपुर है वहीं कान्हा के नाम पर तो प्रदेश में एक भी जिला नहीं है। दर्जनभर जिन जिलों के नाम पूर्ववर्ती सरकारों ने बदले उन्हें पार्टियों की विचारधारा के हिसाब से नामकरण कर दिया गया।

मांग उठी बदल दो मुस्लिम शासकों के नाम
जिन 6 जिलों के नाम को बदलने की चर्चा है, उनमें वे जिले प्रमुख हैं जो मुस्लिम शासकों या फिर उनके सिपहसालारों के नाम पर रखे गए हैं। इनमें अलीगढ़, गाजीपुर, सुलतानपुर और फिरोजाबाद के नाम बदलने का प्रस्ताव जिला पंचायतों ने पारित कर दिया है। या इनके प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। इस बीच फतेहपुर, फर्रुखाबाद, मुरादाबाद, शाहजहांपुर, आजमगढ़ और गाजियाबाद के नाम बदलने की सुगबुगाहट है।

मायावती की पंसद गौतम बुद्ध और अंबेडकर
मायावती ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में महात्मा बुद्ध और दलित महापुरुषों के नाम पर दर्जनभर जिलों के नाम बदले। गाजियाबाद का एक हिस्सा जो नोएडा कहलाता है वह गौतमबुद्धनगर हुआ। तत्कालीन फैजाबाद जिले के एक हिस्से को अंबेडकरनगर कहा गया। इसी तरह अन्य जिलों के नाम बदले गए।

अखिलेश ने बदले थे आठ जिलों के नाम
अखिलेश सरकार भी जिलों के नाम की राजनीति से बच नहीं पायी। सरकार में आते ही अखिलेश ने अमेठी का नाम बदल कर गौरीगंज कर दिया। मायावती ने इसका नाम छत्रपति शाहूजी महाराज नगर रखा था। मायावती कार्यकाल में हापुड़ का नाम पंचशील था, उसे फिर पुराना नाम मिला। इसके अलाव 8 अन्य जिलों के नाम अखिलेश ने बदल दिए। ज्योतिबा फूले नगर का नाम अमरोहा, महामाया नगर हाथरस, कांशीराम नगर कासगंज, रमाबाई नगर का नाम कानपुर देहात, प्रबुद्ध नगर शामली और भीमनगर का नाम फिर से बहजोई कर दिया गया।

योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले मुगलसराय का नाम बदला
मायावती और अखिलेश की ही राह पर योगी आदित्यनाथ भी चले। सत्ता संभालते ही उन्होंने मुगलसराय का नाम दीनदयाल उपाध्याय नगर कर दिया। इसके पहले शासकीय रिकार्ड में इसका नाम चंदौली था। इसी तरह इलाहाबाद प्रयागराज हुआ और फैजाबाद अयोध्या कहलाया। विधानसभा चुनाव से पहले करीब छह जिलों के नाम बदलने की तैयारी है। नए नाम रामायण और महाभारतकालीन आख्यानों से जुड़े हैं।

रामायणकालीन छह नाम
योगी सरकार भले ही राम और कृष्ण के नाम की राजनीति कर रही है लेकिन स्थिति यह है कि राम के नाम रामपुर और मां सीता के नाम पर सीतापुर जिला है। भाई लक्ष्मण के नाम लखनऊ शहर बसा है। अब इसका नाम लखनपुर या लखनावती करने की मांग हो रही है। इसके अलावा रामायणकालीन नामों में प्रयागराज, चित्रकूट और हरदोई हैं। हरदोई का नाम हिरण्यकश्यप से जुड़ा है। हरिद्रोही से यह हरदोई हो गया।

तीन नाम महाभारतकालीन
महाभारत कालीन नामों में मथुरा, बलरामपुर और कौशांबी जिले ही शामिल हैं। कौशांबी पांडव के वंशज परीक्षित की राजधानी थी। कान्हा के करोड़ों भक्त होने के बावजूद कान्हा और राधा के नाम पर सूबे में एक भी जिला नहीं है।

इन जिलों के नाम बदलने की मांग
अलीगढ़-हरिगढ़
फिरोजाबाद-चंद्रनगर
बस्ती-वशिष्ठ नगर
सुलतानपुर-कुशभवनपुर
गाजीपुर--गाधिपुरी
मैनपुरी-मयन नगर