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अब एक डोज में ही होगा जापानी बुखार से बचाव : डॉ अनूप बाजपेयी

बच्चों की पेट से सम्बंधित बीमारीयों, बच्चों में होने वाले कैंसर पर बाल रोग विशेषज्ञों ने अपने विचार पेश किए।

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लखनऊ

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Abhishek Gupta

Nov 18, 2018

Dr. Anoop

Dr. Anoop

लखनऊ. उत्तर प्रदेश पेडिकान के तत्वधान में चल रहे 39वां स्टेट कांफ्रेंस ऑफ इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के तीसरे और अंतिम दिन आज बच्चों को लगने वाली वैक्सीन्स, च्चों की पेट से सम्बंधित बीमारीयों, बच्चों में होने वाले कैंसर पर बाल रोग विशेषज्ञों ने अपने विचार पेश किए।

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए डॉ आशुतोष वर्मा ने बताया कि आज कार्यक्रम के अंतिम दिन जापानी बुखार, बच्चों में होने वाली डाइबिटीज़, पेशाब में होने वाले संक्रमण रोगो, बच्चों में कैंसर आदि विषयों पर चर्चा हुई है. जापानी बुखार पर गोरखपुर से आयी डॉ महिमा मित्तल ने बाल रोग डाक्टरों को लेक्चर दिया जिसमे उन्होंने जापानी बुखार के लक्षण, उनके इलाज, जापानी बुखार में आयी नई वैक्सीन आदि के विषय में बताया है. इसी तरह डाइबिटीज़ जो कि इन दिनों बच्चों में बहुत तेजी से देखने को मिल रही है जिसे बच्चों कि मृत्यु दर बहुत तेजी से बढ़ रही है उस पर भी चर्चा हुई कि किस तरह बच्चों में बढ़ रही डाइबिटीज़ में रोका जाये. उसके लक्षण क्या है और उनका इलाज क्या है. इसी तरह पेशाब में हो रहे संक्रमण रोगो पर इलहाबाद से आये डकटर अनुभव श्रीवास्तव ने अपने लेक्चर दिए और बताया कि पेशाब में संक्रमण रोग कैसे होते है, उनके लक्षण क्या है, कैसे उसका इलाज होना और उससे बचाव के तरीके क्या है. इसी तरह कैंसर में KGMU की तरफ से आये डॉक्टर्स ने लेक्चर्स दिया जिसमे कैंसर से जिंदगी को होने वाले खतरे, उससे बचाव, कैंसर अगर सीरियस स्टेज पर पहुँच गया है तो कैसे मरीज को बचाना है के विषय में डॉक्टर्स ने बताया. बच्चों में होने वाली टीबी पर दिल्ली से आये डाक्टर एस.के कावड़ा ने अपना लेक्चर दिया और टीबी के रोकथाम, उसके इलाज, उसके लक्षण पर अपनी बात रखी.

प्रोग्राम के संदर्भ में और विस्तृत जानकारी देते हुए डॉ दिनेश पांडेय ने बताया कि आज कार्यक्रम के अंतिम दिन चर्चा का जो मुख्य बिंदु है वो है बच्चों के इलाज में आ रही नई-नई वैक्सीन्स. आज के इस सेशन में एक्सपर्ट्स द्वारा बाल रोग डाक्टरों को ये बताया गया कि बाल रोग के क्षेत्र में कौन सी नई वैक्सीन आयी है, उनका प्रभाव क्या है, पुरानी वैक्सीन की जगह पर नई वैक्सीन का क्या एडवांटेज है, कौन सी वैक्सीन मौजूदा दौर में सबसे ज्यादा चलन में है और उन वैक्सीन का इस्तेमाल किस तरह करना है आदि के बारें में बताया गया है. जैसे मलेरिया वैक्सीन हो गयी, डेंगू वैक्सीन इनका क्या स्टेटस है, कब तक ये मार्किट में ये आयेंगी इनके बारे में भी बताया गया है. इसके अतिरिक्त जो दूसरा प्रमुख विषय है आंत की बीमारियां है यानि बच्चों के पेट से जुडी बीमारियां है जिसे PGI के डाक्टर याचा, डॉ अंशुल अग्रवाल सहित कई डॉक्टर्स ने अपने लेक्चर्स दिए है. इन लेक्चर्स में पेट से जुडी कॉमन और अनकॉमन बीमारीयों पर व्याख्यान हुए.

अब एक डोज में ही होगा जापानी बुखार से बचाव : डॉ बाजपेई
जापनी बुखार की चर्चा करते हुए डॉ अनूप बाजपेयी ने कहा कि अभी तक हम लोग जापानी बुखार से बचाव पर उसके रोकथाम के वैक्सीन की दो डोज एक नियमित समय की अंतराल पर लगाते थे पर अब जापानी बुखार से बचाव के लिए अभी तक की सबसे उत्तम वैक्सीन आ गयी है. इस वैक्सीन का एक ही डोज जापानी बुखार से बच्चों का बचाव करेगा. सबसे बड़ी बात इस वैक्सीन की लागत भी आम आदमी के बजट के अंदर होगी. तो कुल मिलाकर आप ये कह सकते है लगातर आ रही नई नई वैक्सीन्स रोगो से बच्चों के बचाव में ज्यादा कारगर सिद्ध होंगी.

एक वैक्सीन से होगी 6 बीमारीयों की रोकथाम :
मुंबई से डॉ शफी ने बताया कि हमारी कंपनी जी.एस.के बायलोजिकल कंपनी ने एक ऐसी वैक्सीन ईजाद की है जो एक साथ 6 बीमारीयों की रोकथाम करेगी. ये वैक्सीन एक कम्बाइन वैक्सीन है जिसमे खसरा, काली खांसी, टिटनेस, पोलियो, हिप्पेटाइटिस 'बी', निमोनिया जैसी 6 बीमारीयों का इलाज एक ही इंजेक्शन में शामिल है. इस वैक्सीन का बड़ा फायदा ये है कि ये पेरेंट्स के लिए भी आसानी पैदा करती है. पैरेंट्स इस वैक्सीन के एक इंजेक्शन से 6 बीमारीयों से अपने बच्चों को बचा सकते है. सबसे बड़ी बात हमारी वैक्सीन के साइड-इफेक्ट का स्तर काफी कम है.

जो वैक्सीन बच्चे पर सबसे ज्यादा प्रभावी हो डॉक्टर्स को उसी का इस्तेमाल करना चाहिए : डॉ बिपिन वशिष्ठ

IPA कमेटी के पूर्व कनविनियर डॉ बिपिन वशिष्ठ ने कहा कि डॉक्टर्स को बच्चें पर उसी वैक्सीन का इस्तेमाल करना चाहिए जो उस पर सबसे ज्यादा असरदार हो. उन्होंने कहा कि अभी भारत सरकार जो MR वैक्सीन कर रही है ये अच्छी है पर अगर इसकी जगह सरकार को MMR वैक्सीन करनी चाहिए यानि इसमें मम्प्स बीमारी को जोड़ देना चाहिए था. मंप्स भी उतनी ही खतरनाक है जितना की खसरा और जापानी खसरा बीमारी है. अगर हम MR की जगह पर MMR करते तो उससे ज्यादा लोगो को फायदा होता.
GOBIND फार्मूले का उपयोग माँ-बाप करें तो बच्चा रहेगा हमेशा स्वस्थ : डॉ वी.एन त्रिपाठी

पूर्व महानिदेशक चिकित्षा शिक्षा व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ वी.एन त्रिपाठी ने बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए पैरेंट्स को GOBIND फ़ार्मूल दिया है.
G ( ग्रोथ) : जब बच्चा पैदा हो उसके बाद से लगातार माँ बाप उसका लम्बाई चौड़ाई को नापते रहे.
O (ORS) इसको पहले दस्त के साथ ही शुरू कर दें क्योकि आज के समय बच्चों की मृत्यु का सबसे बड़ा करण डायरिया है और ORS के रेगुलर उपयोग से 90 फीसदी तक डायरिया को होने से रोका जा सकता है.
B (ब्रेस्ट फीडिंग ): जन्म के आधे से एक घंटे के अंदर माँ का दूध अवश्य बच्चें को पिलाना शुरू कर दें चाहे नार्मल डिलीवरी हुई हो या साजरियन ऑपरेशन और माँ का ये दूध कम से कम दो साल तक बच्चें को पिलायें. इसी तरह जब बच्चा 6 महीने का हो जाये तो उसे साफ़ सुथरा घऱेलू खाना खिलाएं.
I ( इम्यूनाइजेशन) : माँ को टीका टिटनेस का और बच्चें को सरकारी तालिका के अनुसार समय से लगवाते रहे ये टिका किशोरों को भी लगेगा.
N (न्यूट्रिशन): बच्चे के 6 महीने होने बाद उसे माँ के दूध के साथ सतह घऱेलू पोषक आहार जैसे केला, आलू, बिस्कुट, दाल खिचड़ी, रवा की खीर खिलाते रहे.
D (दवा) दवाओं का समुचित प्रयोग यानि जब बच्चों के डाक्टर दवा यानि एंटी बायटिक बताये तब ही उसका इस्तेमाल करें अपने मन से डाक्टर न बन जायें.
तो यदि माँ-बाप GOBIND का पालन करेंगे तो बच्चा/किशोर हमेशा स्वस्थ एवं मस्त रहेगा.