Scholarship Scam: छात्रवृत्ति घोटाले की एसआईटी जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। गिरफ्तारी के डर से एक कर्मचारी ने पूरे मामले की सच्चाई बयां की है। जिसे सुनकर एसआईटी टीम के होश उड़ गए। आइये जानते हैं पूरा मामला...
Disabled Students Scholarship Scam: यूपी की राजधानी लखनऊ में चल रही 45 करोड़ से ज्यादा के छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। एक कॉलेज के कर्मचारी ने खुद की गर्दन फंसते देख कई राज उगले हैं। कर्मचारी के अनुसार, यूपी के साथ ही बिहार, झारखंड समेत पश्चिम बंगाल के 40 से ज्यादा दिव्यांग छात्रों के दस्तावेज लगाकर फर्जी तरीके से छात्रवृत्ति हड़पी गई है। कर्मचारी की बातें सुनकर एसआईटी के अफसर भी हैरान रह गए। आठ महीने में पहली बार एसआईटी को इस मामले में बड़ा क्लू मिला है। इसके साथ ही एसआईटी की दो टीमें पश्चिम बंगाल और बिहार के लिए रवाना कर दी गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार टीम के साथ विवेचक को भी भेजा गया है। इस खुलासे के बाद अब तक कार्रवाई के बचे लखनऊ के दो कॉलेजों के चेयरमैन-मालिक और अन्य कर्मचारियों पर जल्दी ही गाज गिरने का दावा किया जा रहा है। इस घोटाले की जांच ईडी भी कर रही है।
दरअसल, छात्रवृत्ति घोटाले में आठ महीने पहले यानी फरवरी में लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद जेसीपी कानून व्यवस्था उपेंद्र कुमार अग्रवाल की अगुवाई में गठित एसआईटी टीम इस मामले की जांच में जुटी थी। एसआईटी ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसमें हरदोई के जेपी इंटर कॉलेज के प्रबंधक विवेक कुमार, नोडल अधिकारी यशवंत कनौजिया और आरपी ईटर कॉलेज की प्रबंधक पूनम वर्मा को गिरफ्तार किया गया था।
इससे पहले ईडी ने हाईजिया ग्रुप के कर्मचारी रवि प्रकाश गुप्ता और संचालक जाफरी बंधुओं को गिरफ्तार किया था। इसके बाद हजरतगंज कोतवाली में 30 मार्च को दर्ज कराई गई एफआईआर में 10 कॉलेजों के 18 लोग नामजद किए गए थे। जांच के दौरान पता चला था कि इसके अलावा भी कई कॉलेजों ने दिव्यांग छात्रों ने नाम पर छात्रवृत्ति में बड़ा खेल किया है। इस दौरान करीब 45 करोड़ रुपये के घोटाले की पुष्टि भी हो चुकी है।
जेसीपी उपेंद्र कुमार अग्रवाल के मुताबिक, अब तक की जांच की प्रगति का ब्योरा जुटाते समय लखनऊ के दो कॉलेजों के नाम भी सामने आए। इसके अलावा एक फर्रुखाबाद का कॉलेज और कुछ लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई के सुबूत मिले। इसपर टीम से एसएस इंस्टीट्यूट और हाईजिया ग्रुप के जुड़े एक संस्थान के कर्मचारियों के बयान लेने को कहा गया।
टीम जब संस्थान में कर्मचारियों का बयान लेने पहुंची तो एक कर्मचारी ने गिरफ्तारी के डर से राज उगलना शुरू कर दिया। कर्मचारी के खुलासे सुनकर जांच में जुटी एसआईटी टीम भी हैरान रह गई। कर्मचारी ने बताया कि सिर्फ यूपी ही नहीं, बल्कि इन लोगों ने बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक के दिव्यांग छात्रों के दस्तावेज मंगवाकर इनका एडमिशन अपने कॉलेज में दिखाया। इसके बाद बड़े पैमाने पर इनकी छात्रवृत्ति हड़पी गई।
जेसीपी के अनुसार, बाहरी राज्यों के जिन दिव्यांगों के दस्तावेजों पर खेल हुआ, उन्हें मामले की जानकारी ही नहीं है। उनका एडमिशन उत्तर प्रदेश के कॉलेजों में दिखाकर बड़े पैमाने पर छात्रवृत्ति हड़पी गई। जेसीपी उपेंद्र कुमार अग्रवाल ने बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में टीमें भेजी गई हैं। उनके आने के बाद मिले तथ्यों के आधार पर आगे जांच बढ़ाई जाएगी। इस मामले में और लोगों के शामिल होने की आशंका है।