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यहां मां के दर्शन कर लौट आती है आंखों की रोशनी

 मान्यता है कि परिसर में मौजूद 1800 साल पुराने वटवृक्ष से निकलने वाले दूध को आंखों में डालने से नेत्रहीनों को रोशनी मिल जाती है।

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Hariom Dwivedi

Apr 06, 2016

Barahi devi

Barahi devi

गोंडा. पूरे देश में नवरात्रि के पर्व की धूमधाम से तैयारियां हो रही हैं। नवरात्रि के दिनों का खासा महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इन दिनों में देवी मां की पूजा-अर्चना करने से सभी मुरादें पूरी हो जाती हैं। इस खास मौके पर आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहा है, जहां दर्शन मात्र से ही आंखों की रोशनी लौट आती है। मान्यता है कि परिसर में मौजूद 1800 साल पुराने वटवृक्ष से निकलने वाले दूध को आंखों में डालने से नेत्रहीनों को रोशनी मिल जाती है।

देश-विदेश में मिलाकर मातारानी के कुल 51 शक्तिपीठ हैं, जिसमें से यह 34वां शक्तिपीठ है। बाराही देवी या उत्तरीभवानी नाम से मशहूर यह मंदिर वह स्थान है, जहां मातारानी का जबड़ा गिरा था। इस चीज का प्रमाण दुर्गा सप्तशती में भी मिलता है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि जो अंग जहां गिरा, वही पूज्य है।

Barahi devi

विश्व के दूसरे सबसे बड़े वटवृक्ष से घिरा है मंदिर
गोंडा से सटे बेलसर इलाके के उमरीबेगमगंज गांव में स्थित बाराही देवी मंदिर के पुजारी महंत राघव राम ने बताया कि पूरा मंदिर वटवृक्ष की जड़ों से घिरा है। यह वृक्ष करीब एक किमी तक फैला हुआ है। उन्होंने बताया कि ये वृक्ष करीब 1800 साल पुराना है और यह एशिया का दूसरा सबसे बड़ा वटवृक्ष है।

देवी के दर्शन से दूर हुईं गंभीर बीमारियां
पुजारी राघव राम ने बताया कि यहां माता की कृपा से कई रोगियों की बड़ी-बड़ी बीमारियां ठीक हुई हैं। उन्होंने एक किस्सा बताया कि एक शख्स नेत्रहीन था। उसने आंखों की रोशनी वापस पाने के लिए कई जगह इलाज कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। यहां तक कि उसके परिजन उसे दिल्ली के एम्स अस्पताल तक ले गए, लेकिन वह ठीक नहीं हो सका। इसके बाद वह इस मंदिर में आया। यहां उसकी आंखों में वटवृक्ष से निकलने वाले दूध को डाला गया। ये माता का चमत्कार ही था कि वह मरीज ठीक हो गया। पुजारी ने बताया कि ऐसे ही कई किस्से इस मंदिर से जुड़े हुए हैं।

दूर-दूर से आते हैं लोग
पुजारी के अनुसार, मंदिर में गोंडा, बस्ती, बाराबंकी, लखनऊ जैसे यूपी के तमाम जिलों से भक्त मां के दर्शन करने आते हैं। उन्होंने आगे बताया कि यहां पूरे साल सोमवार और शुक्रवार को दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ती है, लेकिन नवरात्रि के दिनों में भीड़ की तादाद काफी बढ़ जाती है। खासकर नवरात्रि के अष्टमी के दिन तो यहां लाखों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। इस दौरान यहां दो-दो किमी की लंबी लाइन लगती है। दूर-दूर से लोग मां के दर्शन करने नंगे पैर ही आते हैं।

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