
अमेरिकी टैरिफ का दबाव झेल रहे भारत ने दूसरे देशों में व्यापार बढ़ाने पर जोर दिया है। इसके लिए द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर भी तेजी से काम कर रहा है। (AI Generated Image)
अमेरिकी टैरिफ का दबाव झेल रहे भारत ने दूसरे देशों में व्यापार बढ़ाने पर जोर दिया है। इसके लिए द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर भी तेजी से काम कर रहा है। इसी क्रम में अब अगला नंबर है 27 देशों के संघ यूरोपियन यूनियन (EU) का। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में ईयू के शीर्ष नेता मुख्य अतिथि होंगे। यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरेपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सला वॉन डेर लेयेन 25 से 27 जनवरी तक भारत की यात्रा पर होंगी। माना जा रहा है कि इस दौरान भारत ईयू से एफटीए पर सहमति बन सकती है। इससे भारत को क्या लाभ होगा। यह समझौता क्यों जरूरी है समझते हैं।
ईयू भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2025 में भारत ने ईयू को 76 अरब डॉलर का माल निर्यात और 60.7 अरब डॉलर आयात किया है। इस हिसाब से ईयू देशों के साथ भारत का ट्रेड सरप्लस भी है। भारत ईयू देशों को मशीनरी, केमिकल, टेक्सटाइल, धातु, खनिज उत्पादों का निर्यात करता है। भारत में 6000 यूरोपीय कंपनियां व्यापार करती हैं। भारत में वर्ष 2023 में यूरोपीय संघ का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 140.1 अरब यूरो था।
ईयू के साथ एफटीए होने पर भारत की 18 ट्रिलियन यूरो के बाजार तक पहुंच बेहतर होगी। टैरिफ कम होने दुनिया के बड़े बाजारों में भारत के उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी। इससे भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार भी बढ़ेगी। खासकर टेक्सटाइल, लेदर, स्टील, फार्मा, मशीनरी इंडस्ट्री को लाभ होगा। इसके अलावा भारत में निवेश भी बढ़ेगा। संभावना है कि डेयरी सेक्टर इस समझौते से बाहर रहेगा। इस समझौते से भारत को अमरीकी और चीन के प्रभुत्व वाली व्यापार व्यवस्था को अपने अनुसार ढालने का मौका मिल सकेगा।
ईयू के साथ व्यापार समझौते को लेकर वाणिज्य सचिव के अनुसार 24 में से 20 अध्यायों पर बात पूरी होने के साथ सहमति बन चुकी है। अब चार मुद्दों पर बातचीत चल रही है। वर्चुअल के बाद आमने-सामने मिल कर बातचीत की योजना भी है। 27 जनवरी को 16वां भारत-ईयू शिखर सम्मेलन होगा। इस दौरान दोनों देशों के बीच एफटीए पर मुहर लगने की उम्मीद है।
Updated on:
17 Jan 2026 05:01 am
Published on:
17 Jan 2026 05:00 am
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