राजधानी में साल 1947 में उन्होंने बुक सेलर के तौर पर काम शुरू किया था। उनके मित्र नवीन बताते हैं कि उनका रिश्ता ग्राहकों से एक दुकानदार और ग्राहक जैसा नहीं बल्कि दोस्त जैसा था। वे लोगों से अक्सर उनकी पसंद, नपसंद के बारे में पूछते थे। वे नए बुकसेलर्स से कॉम्पिटिशन भी नहीं मानते थे। वह कहते थे कि लगभग 60 साल से वह बुक बेच रहे हैं। उन्हें नए कॉम्पिटिटर्स से कोई दिक्कत नहीं।