सपा शासनकाल में कोऑपरेटिव बैंक नियुक्ति घोटाले में होगी होगी एफआईआर, सीएम योगी ने दिए आदेश

उत्तर प्रदेश में सपा शासनकाल के दौरान हुए बहुचर्चित कोऑपरेटिव बैंक नियुक्ति घोटाले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोषी अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी है। दरअसल, एसआईटी ने बीते दिनों मामल में अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। एसआईटी ने दोषी अधिकारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की थी।

By: Karishma Lalwani

Updated: 24 Oct 2020, 12:34 PM IST

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में सपा शासनकाल के दौरान हुए बहुचर्चित कोऑपरेटिव बैंक नियुक्ति घोटाले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोषी अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी है। दरअसल, एसआईटी ने बीते दिनों मामल में अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। एसआईटी ने दोषी अधिकारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की थी। इसी के आधार पर विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) अब नियुक्तियों में भ्रष्टाचार के दोषी तत्कालीन दो प्रबंध निदेशकों समेत अन्य के विरुद्ध नामजद एफआइआर दर्ज कर उन पर अपना शिकंजा कसेगा।

भर्तियों में भ्रष्टाचार का आरोप

सपा शासनकाल के दौरान उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक के सहायक प्रबंधक (सामान्य) व सहायक प्रबंधक (कंप्यूटर) की वर्ष 2015-16 और प्रबंधक व सहायक/कैशियर के पदों पर 2016-17 में की गई भर्तियों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। वर्ष 2012 से 2017 के मध्य उप्र सहकारी भूमि विकास बैंक, उप्र राज्य भंडारण निगम व उप्र कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में भर्ती के 49 विज्ञापन जारी हुए थे, जिनमें से 40 विज्ञापन के तहत भर्ती की प्रक्रिया पूरी की गई थी। कुल 2343 पदों पर भर्ती हुई थी। भर्ती प्रक्रिया प्रबंधक, उप महाप्रबंधक, सहायक प्रबंधक, सहायक शाखा आंकिक, सहायक फील्ड आफिसर, सहायक प्रबंधक (कंप्यूटर), वरिष्ठ शाखा प्रबंधक व लिपिक के पदों के लिए हुई थी।

एसआईटी को सौंपी कापी

भाजपा सरकार ने अलग-अलग पदों पर हुई भर्ती में धांधली की शिकायतों पर पूरे प्रकरण की जांच एसआईटी को सौंपी थी। इनमें एक अप्रैल, 2012 से लेकर 31 मार्च, 2017 तक सहकारिता विभाग में की गई भर्तियों की जानकारी शामिल थी। साथ ही कोऑपरेटिव बैंक के सहायक प्रबंधक पदों पर की गई नियुक्तियों की जांच भी शामिल थी। एसआईटी ने सहायक प्रबंधक के पदों की जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। शासन ने अब उप्र कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड तथा उप्र सहकारी संस्थागत सेवामंडल, लखनऊ की तत्कालीन प्रबंध समिति के अधिकारियों व कर्मचारियों समेत सात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।

इन पर होगी एफआइआर

उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक के तत्कालीन प्रबंध निदेशक हीरालाल यादव व रविकांत सिंह के अलावा उत्तर प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवामंडल के तत्कालीन अध्यक्ष रामजतन यादव, सचिव राकेश मिश्र व सदस्य संतोष कुमार श्रीवास्तव के साथ संबंधित भर्ती कराने वाली कंप्यूटर एजेंसी एक्सिस डिजिनेट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारी व कर्मी दोषी पाए गए थे। इन सभी पर अब एफआइआर दर्ज होगी। इसके अलावा शासन ने उप्र कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड व उप्र सहकारी संस्थागत सेवामंडल की प्रबंध समिति के अन्य अधिकारियों व कर्मियों के विरुद्ध भी धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज किए जाने की मंजूरी दी है।

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