
govardhan
लखनऊ. गोवर्धन पूजा का अपना एक अलग महत्व होता है। यह दीपावली के अगले दिन मनाया जाता है।गोवर्धन त्योहार को अन्नकूट पर्व भी कहा जाता है। इस त्योहार के दिन शाम के समय खास पूजा रखी जाती है। इस दिन खरीफ फसलों से प्राप्त अनाज के पकवान और सब्जियां बनाकर भगवान विष्णु जी की पूजा की जाती है।
इस खास वजह से मनाया जाता है पर्व
गोवर्धन की पूजा महत्व बताते हुए गोमती नगर में रहने वाली पंडित लक्ष्मी पाण्डे कहते हैं कि पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस खास दिन भगवास श्रीकृष्ण ने इंद्र का मानमर्दन कर गिरिराज की पूजा की थी। इस दिन मंदिरों में अन्नकूट किया जाता है। इस दिन मंदिरों में भी अनेक प्रकार के भोजन खान-पान बनाकर प्रसाद के रूप में भगवान को 56 भोग लगाए जाते हैं।
इस विशेष दिन गोबर का गोवर्धन बनाया जाता है। यह मनुष्य के आकार के होते हैं। गोबर्धन तैयार होनेके बाद उसे फूलों अौर पेड़ों के डालियों से सजाया जाता है। गोबर्धन को तैयार कर शाम के समय इसकी पूजा की जाती है। पूजा में धूप, दीप, नैवेद्य, जल, फल, खील, बताशे आदि का इस्तेमाल किया जाता है। गोवर्धन में ओंगा यानि अपामार्ग की डालियां जरूर रखी जाती हैं।
गोवर्धन पूजा govardhan 2017 शुभ मुहूर्त
पंडित लक्ष्मी पाण्डे बताते हैं कि गोवर्धन पूजा का शुभ का सुबह का मुहूर्त- 06:28 बजे से 08:43 बजे तक है। वही शाम का मुहूर्त - 03:27 बजे से सायं 05:42 बजे तक है। प्रतिपदा - रात 00:41 बजे से शुरू (20 अक्टूबर 2017)। प्रतिपदा तिथि समाप्त - रात्रि 1:37 बजे तक (21 अक्तूबर 2017)
ऐसे करें पूजा
गोवर्धन की पूजा गोबर से गोवर्धन पर्वत्त बनाएं।फिर उस पर अक्षत, रोली, चंदन, फूल, दूर्वा, जल, बताशा, फल, दूध आदि चढाएं। फिर तिल या घी के दीपक जलाएं। इसके बाद गायों को स्नान करने के बाद उसे आरती दिखाकर मिठाई खिलाएं। इस दिन मंदिरों में अन्नकूट किया जाता है। इस दिन गोबर का गोवर्धन बनाया जाता है इसका खास महत्व होता है। अन्न की पूजा के साथ इस दिन कई जगह लंगर और भण्डारे लगाए जाते हैं।
कृष्ण ने उठाया गोवर्धन पर्वत
कृष्ण की बात मानते हुए सभी ब्रजवासियों ने इंद्रदेव की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इस पर क्रोधित होकर भगवान इंद्र ने मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। तब कृष्ण ने वर्षा से लोगों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया।
सभी गांंव वाले अपने पशुओं के साथ इसके नीचे आ गए। इससे इंद्र देव का क्रोध और बढ़ गया व उन्होंने बारिश को और तेज कर दिया। इंद्र का अभिमान चूर करने के लिए तब श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से कहा कि आप पर्वत के ऊपर रहकर वर्षा की गति को नियंत्रित करें और शेषनाग से कहा कि वह पर्वत की ओर पानी आने से रोकने के लिए मेड़ बना दें।
Published on:
20 Oct 2017 11:20 am
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