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विशेष शिक्षकों के वेतन पर चार माह में निर्णय करे सरकार: हाईकोर्ट

हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में कहा गया था कि ये शिक्षक 13,200 रुपये पा रहे हैे, जबकि नियमानुसार उन्हें अन्य शिक्षकों के समान वेतन देना चाहिए। 

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Ashish Kumar Pandey

Jan 03, 2017

high court

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लखनऊ. हाईकोर्ट ने कहा है कि प्रदेश सरकार विशेष बच्चों की शिक्षा व प्रशिक्षण के लिए तैनात सर्व शिक्षा अभियान के शिक्षकों को राज्य के अन्य शिक्षकों के समान वेतनमान देने पर चार महीने में निर्णय करे। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में कहा गया था कि ये शिक्षक 13,200 रूपये पा रहे हैे, जबकि नियमानुसार उन्हें अन्य शिक्षकों के समान वेतन देना चाहिए।

जस्टिस देवेद्र कुमार उपाध्याय ने याचिका का निपटरा करते हुए प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को निर्देश दिया कि वे मामले में तत्काल निर्णय करें। साथ ही इसके लिए सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक से सलाह लें। याचिका विशेष शिक्षक संगठन ने दायरकी थी। इसमे ंबताया गया था कि इन शिक्षकों को सर्व शिक्षा अभियान के तहत संविदा पर रखा गया है। वे विशेष तरह के बच्चों को पढ़ाते है। केद्र सरकार ने इन बच्चों के लिए इंटीग्रेटेड एजुकेशन ऑफ डिसेबल्ड चिल्ड्रन (आईईडीसी) स्कीम लॉन्च की थी। प्रदेश में इसे सर्व शिक्षा अभियान के तहत चलाया जा रहा है।

आईईडीसी के नियम 12.3 के अनुसार इन विशेष शिक्षकों को राज्य में इस श्रेणी के शिक्षकों के बराबर पे-स्कूल दिया जाना चाहिए। स्पेशल पे के रूप में शहरी क्षेत्र में 150 और ग्रामीण क्षेत्र में 200 रुपये अतिरिक्त मिलने चाहिए। अभियान के परियोजना अधिकारी के 22 जनवरी 2010 के आदेश में भी कहा गया है कि इसमें लगे संविदा कर्मचारियों को बेसिक-पे का न्यूनतम ग्रेड पे, डीए, एचआरए और सीसीए मिलना चाहिए। इसके बावजूद इन शिक्षकों को केवल 13,200 रुपये दिया जा रहा है। अदालत ने याचिकाकर्ता से भी अपना मामला सरकार के सामने विस्तार से 15 दिन में रखने और वेतन से जुड़ी शिकायतें बताने को कहा। सरकार के सामने विकल्प होगा कि वह जरूरी दस्तावेज व रिपोर्ट मंगवाए और इन शिक्षकों के वेतन मामले में औचित्यपूर्ण निर्णय करे। इसके लिए सरकार को चार महीने का समय दिया गया है।