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राज्यपाल ने पंचायती राज समेत दो विधेयकों को अनुमति दी और दो राष्ट्रपति को भेजे

कर्मचारी प्रतिकर (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2017 - भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण उपकर

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लखनऊ

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Anil Ankur

Dec 30, 2017

Governor aproved two ordinence and two sent to President

Governor aproved two ordinence and two sent to President

लखनऊ । उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने राज्य विधान मण्डल के दोनों सदनों से पारित विधेयकों पर निर्णय लेते हुए (1) उत्तर प्रदेश पंचायत राज (संशोधन) अधिनियम 2017 एवं (2) उत्तर प्रदेश विनियोग (2017-18 का अनुपूरक) विधेयक 2017 को अपनी अनुमति प्रदान कर दी है तथा (1) कर्मचारी प्रतिकर (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2017 एवं (2) भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण उपकर (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2017 को राष्ट्रपति को संदर्भित कर दिया है।उत्तर प्रदेश पंचायत राज (संशोधन) अधिनियम 2017 द्वारा पूर्व में अधिनियमित संयुक्त प्रान्त पंचायत राज अधिनियम 1947 में संशोधन किया गया है। उत्तर प्रदेश राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय शासन की स्थापना और विकास के लिए उक्त अधिनियम गठित हुआ था जिसके द्वारा ग्राम पंचायतों और न्याय पंचायतों की व्यवस्था थी। परन्तु 73वें संविधान संशोधन अधिनियम 1992 द्वारा त्रि-स्तरीय ग्राम पंचायतों की व्यवस्था की गयी। 73वें संविधान संशोधन के फलस्वरूप न्याय पंचायतें अक्रियाशील हो गयी हैं। उत्तर प्रदेश पंचायत राज (संशोधन) अधिनियम 2017 द्वारा संयुक्त प्रान्त पंचायत राज अधिनियम 1947 में संशोधन कर न्याय पंचायतों से संबंधित उपबंधों को हटाया गया है।
उत्तर प्रदेश विनियोग (2017-18 का अनुपूरक) विधेयक 2017 द्वारा 31 मार्च, 2018 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में सरकार द्वारा सेवाओं और प्रयोजनों के संबंध में विविध परिव्यय चुकाने के लिए आवश्यक धनराशि की व्यवस्था की गयी है।
कर्मचारी प्रतिकर (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2017 द्वारा पूर्व में अधिनियमित कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम 1923 के प्राविधानों में संशोधन किया गया है। नियोजक के साथ अपनी ड्यूटी के दौरान और अपने नियोजन में हुई क्षति या दुर्घटना के लिए कर्मचारियों को प्रतिकर प्रदान करने की व्यवस्था है। परन्तु आश्रितों की निरक्षरता या अज्ञानता के कारण प्रतिकर दावा प्रस्तुत करने में उत्पन्न होने वाली कठिनाईयों के दृष्टि संशोधित विधेयक द्वारा व्यवस्था की गयी है कि प्रतिकर दावा प्रस्तुत करने हेतु राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी के माध्यम से आश्रितों द्वारा अपना दावा प्रस्तुत किया जा सकता है।
भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण उपकर (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2017 द्वारा पूर्व में अधिनियमित भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम 1996 में संशोधन कर धारा 3 में उपधारा(1) बढ़ा अधिनियम के प्रावधानों को स्पष्ट किया गया है, जिसके द्वारा उपकर के निर्धारण हेतु भूमि के मूल्य, किसी कर्मकार या उसके उत्तराधिकारयों को संदत्त प्रतिकर, एम0आर0आई0, सी0टी0 स्कैन और डायलिसिस जैसी मशीनों को उपकर के निर्धारण से छूट प्राप्त है।
राष्ट्रपति को संदर्भित दोनों विधेयकों के प्रस्तावित प्रावधानों से केन्द्रीय कानून प्रभावित होने के कारण विधेयकों पर राष्ट्रपति का अनुमोदन आवश्यक है। इसी दृष्टि से राज्य सरकार ने राज्यपाल को भेजे गये अपने प्रस्ताव में कहा है कि उक्त विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए संदर्भित कर दिया जाये।