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GST ने यूपी में प्लाईवुड उद्योग को किया तबाह, 1100 करोड़ की इंडस्ट्री को तगड़ा नुकसान

नोटबंदी से हुए नुकसान के बाद अब जीएसटी की मार ने यूपी की प्लाईवुड इंडस्ट्री को बंद की कागार पर ला दिया है।

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Prashant Srivastava

Jul 21, 2017

plywood

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लखनऊ.
नोटबंदी से हुए नुकसान के बाद अब जीएसटी की मार ने यूपी की प्लाईवुड इंडस्ट्री को बंद की कागार पर ला दिया है। 1100 करोड़ की यूपी की प्लाईवुड इंडस्ट्री का देश की प्लाईवुड इंडस्ट्री में दस फीसदी हिस्सा है और लगभग पांच लाख लोग इस व्यापार से जुड़े हैं। एक अंग्रेजी अखबार का दावा है कि जीएसटी ने प्लाईवुड इंडस्ट्री की कमर तोड़ दी है।


प्लाईवुड इंडस्ट्री पर 28 फीसदी जीएसटी लागू है। वहीं लकड़ी, सनमाइका पर 18 फीसद है।अवध प्लाईवुड मैनुफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल का कहना है कि प्लाईवुड पर 28 फीसद जीएसटी लागू होने से ये आम आदमी की रेंज से बाहर हो गया है। इस कारण मुनाफा भी घट गया है। उनके मुताबिक प्लाईवुड इंडस्ट्री पर पहले से ही बहुत बोझ था। 2.5% तो मंडी फीस है जो रॉ मैटेरियल पर लगती थी। यानि अब हमें 30% से ऊपर टैक्स देना पड़ रहा है। इस कारण हमारा बिजनेस फ्लॉप हो गया है।


पिछले दिनों प्लाईवुड उत्पादकों ने 14 जुलाई से 17 जुलाई के बीच प्रदेश बंद का ऐलान कर विरोध प्रदर्शन भी किया था। इसके अलावा उत्पादकों ने सीएम
योगी आदित्यनाथ
तक भी अपनी बात पहुंचाने की तमाम कोशिशें की हैं। उन्होंने प्लाईवुड पर जीएसटी धटाकर 28 फीसद से 18 फीसद करने का आग्रह किया है। इसके अलावा मंडी फीस भी हटवाने की मांग की है। इस सिलसिले में केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार से भी मुलाकात कर अपना रक्षा रखा था लेकिन फिलहाल कोई राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही।


पापुलर और यूकेलिप्टस जैसी सस्ती लकड़ी से बने प्लाईवुड उत्पादों पर 28 फीसदी जीएसटी थोपे जाने और एक कर प्रणाली से जुड़ी विसंगतियों की किसी भी स्तर पर सुनवाई नहीं किए जाने के विरोध में प्रदेश के विभिन्न शहरों से आए प्लाईवुड निर्माताओं ने बीते दिनों हड़ताल की।प्लाईवुड फैक्ट्री मालिकों की नाराजगी है कि केंद्र सरकार ने जानबूझकर प्लाईवुड पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाई है ताकि उद्यमियों को परेशान किया जा सके। उनका कहना है कि प्लाईवुड पर लगने वाला सनमाईका पर जीएसटी महज 18 प्रतिशत है जबकि प्लाईवुड पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाया गया है।


उनका कहना है कि सरकार सस्ता आवास और किसानों की आय बढ़ाने का सपना देख रही है लेकिन अगर प्लाईवुड उद्योग प्रभावित हुए हुआ था तो आवासों के लिए ना ही प्लाईवुड का बेहतर उत्पादन हो पाएगा और न ही किसान पॉपलर की लकड़ी की खेती से बेहतर आय अर्जित कर पाएगा।यूपी में लगभग 500प्लाईवुड उत्पादक हैं जो कि लखनऊ, कानपुर , सुहारनपुर के आसपास रहते हैं। केवल लखनऊ में ही लगभग 60 मैनुफैक्चरर रहते हैं।


कालीन उद्दोग का भी हाल बेहाल


नोटबंदी से तबाह हुए कालीन उद्योग पर जीएसटी की भी मार पड़ी है। जीएसटी के लागू होने के बाद बुनकरों मजदूरों पर लगाये गए 18 फीसदी जीएसटी और इन सामानों की बिक्री व खरीद पर 12 प्रतिशत जीएसटी को लागू करने की वजह से यह उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है।


कालीन निर्माताओं और निर्यातक संघों के अनुसार जीएसटी के चलते देशभर में लगभग 5,000 इकाइयां बंद हो गई हैं और बंद होने के कगार पर पहुंच गई हैं। इसके चलते करीब 20 लाख कारीगरों और उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है।


कालीन निर्यात संवर्धन परिषद के अनुसार इन उत्पादन इकाइयों को बंद करने के कारण लगभग 1,000 करोड़ रुपये के निर्यात का नुकसान हुआ है। कोई नया आर्डर नहीं दिया जा रहा है और नए आर्डर के लिए बुनाई लगभग पूरी तरह बंद हो गई है। पुराने आर्डर और पुराने स्टॉक भी टैक्स लागू करने के डर से पूरे नहीं किये जा रहे हैं। पुराने अनुबंधों के कारण खरीदारों से अधिक पैसे नहीं मिल रहे हैं और पैसा खोने की चिंता सता रही है।



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