
लखनऊ. पैरों में जूते पहनना हर व्यक्ति की जरूरत और मजबूरी है। नये साल के पहले दिन जिस भी शख्स से नये जूते खरीद होंगे उसे GST की बढ़ी दरों के हिसाब से भुगतान करना पड़ा होगा। साल 2021 के आखिरी दिन जीएसटी काउंसिल की बैठक में जीएसटी बढ़ाने के फैसले ने उपभोक्ताओं के साथ ही जूते के व्यापारियों और जूते बनाने वाले उत्पादकों की चिंताएं और मुसीबतें बढ़ा दीं है। जीएसटी काउंसिल ने 31 दिसंबर को जूते और चप्पलों पर जीएसटी की दर एक जनवरी से पांच फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने के लिए मंजूरी दे दी। देशभर में सबसे ज्यादा जूतों का निर्माण ताजनगरी आगरा में होता है। इसके बाद कानपुर का नंबर आता है। यूपी में जूतों में Goods and Service Tax बढ़ने से उत्पादकों में भारी नाराजगी है।
जूते निर्माण में आगरा-कानपुर है अग्रणी
उत्तर प्रदेश के आगरा, कानपुर और उन्नाव जूतों के निर्माण में अग्रणी है। यहां पर के बने जूते भारत के अलावा विदेशों में भी भेजे जाते हैं। आगरा में जूतों के उत्पादन और कारोबार से चार लाख लोग जुड़े हुए हैं। इसी तरह कानपुर व उन्नाव में हजारों की संख्या में कारोबारी और कर्मचारी इस उद्योग से जुड़े है। इन कारोबारियों पर निश्तिच ही जीएसटी की प्रस्तावित बढ़ोतरी का असर पड़ेगा।
जीएसटी (GST) बढ़ने से कारोबारी नाराज
एक हजार रुपये तक के एक जोड़ी जूते जो शुक्रवार तक 1050 रुपये के बिक रहे थे, अब 1120 रुपये में मिल सकेगा। जूता कारोबारियों ने शुक्रवार को जीएसटी काउंसिल के फैसले का विरोध करने के साथ बढ़ोतरी पर आक्रोश जताया, वहीं कपड़ा व्यापारियों में खुशी है।
लग्जरी नहीं आम आदमी की जरूरत हैं जूते
जूतों के कारोबार से जुड़े संगठन के लोगों का कहना है कि जूते लग्जरी नहीं, बल्कि जरूरत हैं। आम आदमी पर यह सीधे-सीधे बोझ डालने वाली बात है। जीएसटी काउंसिल को कपड़े की तरह जूते पर जीएसटी पर बढ़ोतरी स्थगित रखनी चाहिए। जब बाजार पहले से ही अधमरा है, तब जीएसटी की बढ़ोतरी पूरे उद्योग को नुकसान पहुंचाएगी।
जीएसटी कम करने की मांग हुई तेज
फुटवियर मैन्यूफैक्चरिंग से जुड़े लोगों का कहना है कि फुटवियर पर पांच फीसदी से जीएसटी बढ़ाकर 12 फीसदी पूरे उद्योग के लिए गलत है। कारोबारियों ने मांग की कि चुनाव से पहले ही यह बढ़ोतरी वापस ली जानी चाहिए। जब तक जीएसटी कम नहीं होता, हमारा आंदोलन जारी रहेगा।
Published on:
01 Jan 2022 06:19 pm
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