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गुंडा व गैंगस्टर एक्ट में पुलिस की कार्रवाई अदालतों के लिए बन रही मुसीबत!

पुलिस गुंडा व गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई के बाद नहीं दे पा रही पुख्ता सबूत।

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लखनऊ

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Dhirendra Singh

Sep 12, 2017

Gunda Act and Gangster Act

Gunda Act and Gangster Act

लखनऊ. राजधानी में अपराधियों पर काबू पाना एक समस्या हैं, वहीं अपराधियों पर बिना पुख्ता सबूत सख्त कार्रवाई करने की प्रक्रिया दूसरी बड़ी समस्या बन रही है। इसका बोझ पुलिस और अदालत दोनों को झेलना पड़ रहा है। वैसे ही राजधानी की अदालतों में हजारों केस लंबित पड़े हुए हैं। पहले ही न्यायालयों में अभियोजन अधिकारियों की कमी के चलते मुकदमों का जल्द निस्तारण संभव नहीं हो पा रहा है। ऊपर से पुलिस द्वारा बिना पुख्ता सबूत और तथ्यों के अपराधियों पर गुंडा एक्ट और गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई बड़ी मुसीबत बन रही है। कोर्ट में अपराधियों पर जब यह आरोप सिद्ध करने के बात आती है, तो सबूत के अभाव में मामले लंबित हो रहे हैं। जानकारी के मुताबिक हाल में ही जनपद पुलिस ने करीब 800 मामले गुंडा और गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई के लिए भेजे हुए हैं। फिलहाल वर्तमान हालात ये है कि अधीनस्त एवं सत्र न्यायालयों में कुल लंबित केस की संख्या 81 हजार से ऊपर पहुंच चुकी है।

जानकारी के मुताबिक मुकदमों के निस्तारण के लिए संयुक्त निदेशक अभियोजन कार्यालय लखनऊ में अभियोजन अधिकारियों के कुल 33 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में यहां 15 अफसर ही तैनात हैं। अधिकारियों की कमी के चलते पैरवी न हो पाने के चलते अदालतों में मुकदमों का भार बढ़ता ही जा रहा है। इससे लंबित मुदकमों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी भी हो रही है।
वहीं अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की जल्दीबाजी अलग से अदालतों के बोझ को बढ़ा रही है। राजधानी में पुलिस मारपीट, शराब पकड़ने समेत कई मामलों में भी गैंगस्टर और गुंडा एक्ट में कार्रवाई कर रही है। हाल में मारपीट व लड़ाई-झगड़े के आरोपी, गलत तरीके से शराब रखने के आरोपियों पर भी उन्हें गुंडा और गैंगस्टर बना दिया। इस संबंध में करीब 800 मामलों की फाइले चल रही हैं। लेकिन अदालत में ऐसे पुख्ता सबूत न मिलने पर मामला अटक जाता है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गुंडा और गैंगस्टर एक्ट में उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई होती है, जिनसे समाज को खतरा साबित होता है। लेकिन अगर इस बात की अंदेखी कहीं भी हो रही है तो उसकी जांच की जाएगी।