हाथरस केस: हाईकोर्ट ने पूछा डीएम पर क्या कार्रवाई हुई, सरकार ने कहा- जल्द करेंगे तबादला

- सीबीआई को 25 नवंबर को स्टेटस रिपोर्ट जमा करने का निर्देश

By: Abhishek Gupta

Published: 03 Nov 2020, 04:58 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क.
लखनऊ. इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad Highcourt) की लखनऊ खंडपीठ ने हाथरस मामले (Hathras Case) में यूपी सरकार की जांच की निष्पक्षता के लिए जिला मजिस्ट्रेट प्रवीण कुमार (Praveen Kumar) के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने पर चिंता जताते हुए अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। राज्य सरकार ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 25 नवंबर तक अदालत को इस संबंध में निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। कहा है कि सरकार डीएम हाथरस का तबादला करेगी। कोर्ट ने सीबीआई को भी 25 तक अपनी स्टेटस रिपोर्ट जमा करने को कहा है।

हाइकोर्ट की लखनऊ बेंच में हुई सुनवाई में हाथरस के जिलाधिकारी, एसपी ने लिखित हलफनामा दिया, वहीं दूसरी ओर कोर्ट के द्वारा डीएम पर कार्रवाई के पूछे जाने पर सरकार की तरफ से जल्द ट्रांसफर कर देने का आश्वासन दिया गया। न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति राजन रॉय की पीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई की। पीठ ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह सुनवाई की अगली तारीख को मामले में जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करे। हाईकोर्ट जज ने मीडिया रिपोर्टिंग और बयानबाजी पर भी सख्त टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद वकीलों और सभी पक्षकारों का मोबाइल बाहर ही जमा करवा लिया गया।

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बंद कमरे में सुनवाई
इन-कैमरा कार्यवाही के दौरान, पीठ ने राज्य सरकार से पूछा था कि मामले में कुमार पर कार्रवाई के बारे में क्या निर्णय लिया गया। इस पर सरकार ने डीएम का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया। सरकारी वकील ने कहा कि कथित गैंगरेप मामले में एसपी को जांच को सही तरीके से संचालित करने में कमी के कारण निलंबित कर दिया गया था (श्मशान मामले में नहीं)। पीठ ने कहा कि उसने राज्य से पूछा था कि क्या निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हाथरस में कुमार को बनाए रखना सही है, यह कहते हुए कि राज्य ने अदालत को मामले में जरूरी कदम उठाने का आश्वासन दिया था।

दाह संस्कार में किरोसिन का इस्तेमाल नहीं
राज्य सरकार के हलफनामे में हाथरस जैसी परिस्थितियों में अंतिम संस्कार के दिशानिर्देशों का मसौदा पेश किया गया। हलफनामों में, डीएम और निलंबित एसपी ने कहा कि रात में पीडि़ता का अंतिम संस्कार करने का निर्णय स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया था। शव के दाह संस्कार में केरोसिन का इस्तेमाल नहीं हुआ था। अदालत को बताया गया कि पीडि़ता के पिता के बैंक खाते में मुआवजा राशि स्थानांतरित कर दी गई है। और परिवार को सीआरपीएफ सुरक्षा दे रही है।

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ट्रायल यूपी के बाहर हो-
अभियुक्त के लिए पेश सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत से अपने आदेशों में कोई भी अवलोकन नहीं करने का अनुरोध किया जो जांच को प्रभावित कर सकता है। इस बीच, पीडि़ता की वकील सीमा कुशवाहा ने ट्रायल को उत्तर प्रदेश से बाहर स्थानांतरित करने की मांग दोहराई।

डीएम का बयान बदला-
बंद कमरे में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट में पेश हुए पूर्व एसपी हाथरस ने बताया कि पीडि़ता की रात में लाश जलाने का फैसला उनका और डीएम का था। जबकि पिछली पेशी पर डीएम ने कहा था कि लाश जलाने का फैसला उनके साथ आलाधिकारियों का भी था।

पीड़िता की वकील की आपत्ति-
एसपी विक्रांत वीर ने बताया कि पीडि़ता का शव और परिजन एक गाड़ी से दिल्ली से हाथरस लाए गए थे। जबकि एडीजी ने पिछली पेशी पर कोर्ट को बताया कि दोनों अलग अलग गाड़ी में थे। अफसरों के इसी विरोधाभासी बयान पर पीडि़ता की वकील ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि अफसर कोर्ट में अलग-अलग थ्योरी दे रहे हैं।

ढाई घंटे कोर्ट में रहे मौजूद
सोमवार को मामले की करीब ढाई घंटे सुनवाई हुई। कोर्ट में गृह विभाग के सचिव तरुण गावा, एडीजी एलओ प्रशांत कुमार, तत्कालीन एसपी विक्रांत वीर मौजूद थे। सरकार की तरफ से तत्कालीन एसपी विक्रांत भीम और डीएम प्रवीण कुमार ने हलफनामा पेश किया। आरोपी पक्ष की तरफ से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा, केंद्र सरकार की तरफ से एडवोकेट एसपी राजू, एडवोकेट जयदीप नारायण माथुर और उत्तर प्रदेश सरकार के महाधिवक्ता वीके शाही ने बहस की। वहीं पीडि़त पक्ष की तरफ से एडवोकेट सीमा कुशवाहा ने अपना पक्ष रखा।

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