
लखनऊ. इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी के तहत आरोपी के खिलाफ ठोस सबूत होने पर उसकी गिरफ्तारी की जाए। बताते चलें कई बार पुलिस आपराधिक शिकातों के बाद मामलों में मनमानी करते हुए सबूतों के अभाव में भी आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज देती है। ऐसे में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक मामले में सुनवाई करते हुए टिप्पणी की है की आरोपियों की गिरफ्तारी ठोस सबूत मिलने के बाद ही की जाए। कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब पुलिस के लिए बिना ठोस सबूत के आरोपी को गिरफ्तार करना आसान नहीं होगा। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा है कि पुलिस आरोपियों को तभी गिरफ्तार करें जब उसके पास पर्याप्त सबूत हों।
अधिकारों की होनी चाहिए जानकारी
हमें अपने अधिकारों के बारे में जानकारी नहीं होती है जिसके चलते कई बार पुलिस कर्मचारी अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में अगर हम अपनी जानकार बढ़ाएं व अधिकारों को जाने तो हम पुलिस कर्मचारियों के गलत व्यवहार को रोक करते हैं और अन्हे उनके अधिकारी व ड्यूटी का हलावा देकर सही कार्यवाई करने के लिए कह सकते हैं। हम सभी को अपने अधिकारों को बारे जानना चाहिए। अधिकारों के बार में जानकारी लेने के लिए हमें कानून की जनकारी होना जरूरी है जिसके लिए हमें समाचार पत्र व कानून की किताबें पढ़नी चाहिए।
इस मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने की थी टिप्पणी
बीते दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रतापगढ़ में भाजपा सांसद संगम लाल गुप्ता व समर्थकों पर हमला करने के मामले में दो आरोपियों को राहत दी थी। कोर्ट ने आदेश दिया था कि याची के खिलाफ ठोस सबूत मिलने पर ही उनकी गिरफ्तारी की जाए। न्यायमूर्ति देवेंद्र उपाध्याय और न्यायमूर्ति ने यह आदेश चंद्रशेखर सिंह व एक अन्य आरोपी की याचिका पर दिया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद एक सीधा संदेश दिया गया है कि पुलिस बिना ठोक सबूत के आरोपी को गिरफ्तार न करे। समान्यता कई बार पुलिस बिना सबूत के आरोपी को गिरफ्ता कर जेल भेज देती है। जिसके बार कोर्ट से आरोपी को राहत मिल जाती है लेकिन पुलिस की इस कार्यवाई से आरोपी को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है जिससे बचने के लिए कोर्ट ने निर्देश दिए है कि सबूत के बाद ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाए।
Published on:
30 Dec 2021 01:04 pm
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