12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

चार्जशीट जमा करने में खेल नहीं कर पाएगी पुलिस, देरी हुई तो आरोपी को मिलेगी जमानत

तमाम मामलों में पुलिस निर्धारित समय सीमा के अंतदर चार्जशीट नहीं दाखिल करती है ऐसे में चार्जशीट दाखिल न होने पर कोर्ट से आरोपी को जमानत नहीं मिल पाती है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद अब चार्जशीट दाखिल न होने की स्थिति पर आरोपी को डिफाल्टर जमानत मिल सकेगी।

less than 1 minute read
Google source verification

लखनऊ

image

Prashant Mishra

Nov 09, 2021

लखनऊ. पुलिस की  चार्जशीट फाइल करने के लिए निर्धारित समय 90 या 60 दिनों के अंदर चार्जशीट को कोर्ट में दाखिल करना होगा, अगर पुलिस ऐसा नहीं कर पाती है तो आरोपी को कोर्ट से जमानत मिल जाएगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले ने कहा कि 90 या 60 दिन निर्धारित अवधि में अगर चार्जशीट दायर नहीं की जाती है तो आरोपी को सीआरपीसी की धारा 167(20) के तहत डिफाल्टर जमानत पाने का अपरिहार्य अधिकार है।   तमाम मामलों में पुलिस निर्धारित समय सीमा के अंतदर चार्जशीट नहीं दाखिल करती है ऐसे में चार्जशीट दाखिल न होने पर कोर्ट से आरोपी को जमानत नहीं मिल पाती है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद अब चार्जशीट दाखिल न होने की स्थिति पर आरोपी को डिफाल्टर जमानत मिल सकेगी।  कोर्ट ने यह टिप्पणी एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए दी है सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राजेंद्र सिंह चौहान ने दुष्कर्म के केस में आरोपी एक व्यक्ति को सशर्त जमानत मंजूर की है। महानगर थाने में आरोपी वरुण तिवारी के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म व पोस्को एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी आरोपी को बीते 14 जनवरी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। आरोपी के पक्षकार वकील का कहना था कि यह एक ऐसा मामला है जिसमें 90 दिनों की निर्धारित अवधि पूरी हो जाने के बावजूद भी पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल नहीं की गई जिसके बाद धारा 167(2)  सीआरपीसी के तहत हाईकोर्ट ने याची को राहत देते हुए निचली आदालत को डिफाल्टर

,

लखनऊ. पुलिस की चार्जशीट फाइल करने के लिए निर्धारित समय 90 या 60 दिनों के अंदर चार्जशीट को कोर्ट में दाखिल करना होगा, अगर पुलिस ऐसा नहीं कर पाती है तो आरोपी को कोर्ट से जमानत मिल जाएगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले ने कहा कि 90 या 60 दिन निर्धारित अवधि में अगर चार्जशीट दायर नहीं की जाती है तो आरोपी को सीआरपीसी की धारा 167(20) के तहत डिफाल्टर जमानत पाने का अपरिहार्य अधिकार है।

तमाम मामलों में पुलिस निर्धारित समय सीमा के अंतदर चार्जशीट नहीं दाखिल करती है ऐसे में चार्जशीट दाखिल न होने पर कोर्ट से आरोपी को जमानत नहीं मिल पाती है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद अब चार्जशीट दाखिल न होने की स्थिति पर आरोपी को डिफाल्टर जमानत मिल सकेगी।

कोर्ट ने यह टिप्पणी एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए दी है सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राजेंद्र सिंह चौहान ने दुष्कर्म के केस में आरोपी एक व्यक्ति को सशर्त जमानत मंजूर की है। महानगर थाने में आरोपी वरुण तिवारी के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म व पोस्को एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी आरोपी को बीते 14 जनवरी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। आरोपी के पक्षकार वकील का कहना था कि यह एक ऐसा मामला है जिसमें 90 दिनों की निर्धारित अवधि पूरी हो जाने के बावजूद भी पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल नहीं की गई जिसके बाद धारा 167(2) सीआरपीसी के तहत हाईकोर्ट ने याची को राहत देते हुए निचली आदालत को डिफाल्टर