महादेवी वर्मा की मुख्य कविताएं अधिकार, अलि! मैं कण-कण को जान चली, अलि अब सपने की बात , अश्रु यह पानी नहीं है उत्तर, कहां रहेगी चिडिय़ा, किसी का दीप निष्ठुर हूं ,कौन तुम मेरे हृदय में, क्या जलने की रीत, क्या पूजन क्यों इन तारों को उलझाते?, जब यह दीप थके आदि हैं। इसके अलावा नीहार (1933), रश्मि (1932), नीरजा( 1933), सहह्गीत (1934), दीपशिखा (1942), यामा उनके लिखे काव्य संग्रह हैं। उन्हें 1979 में साहित्य अकादमी फेलोशिप, 1982 ज्ञानपीठ पुरस्कार, 1946 पद्मभूषण, 1988 पद्मविभूषण पुरस्कार मिला।