
jal vihar festival
हमीरपुर। बुंदेलखंड की ऐतिहासिक परंपरा को हमीरपुर जनपद के थाना जरिया क्षेत्र के पवई गांव में एकता और भारतीय संस्कृति के रूप में झिंझिया जल विहार के नाम से शरद पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। तालाब में भगवान श्रीकृष्ण के संपूर्ण अलौकिक स्वरूपों का तालाब में वर्णन करके झांकियों के रूप में निकाला जाता है। इसमें सैलानी दूर दराज से हजारों की संख्या में आते हैं। बुजुर्गो का कहना है कि इस ऐतिहासिक रस्म को वे बचपन से देखते आ रहे है। इस मेले का अपना अलग महत्व है। ग्राम प्रधान राम गोपाल जी ने बताया की यह परंपरा सैकड़ों वर्ष पुरानी है जिसे सब मिल कर आगे ले जा रहे हैं।
राम गोपाल ने बताया कि शरद पूर्णिमा के दिन मथुरा में श्रीकृष्ण भगवान ने 16000 पत्नियों के साथ नृत्य किया था। कहा जाता है कि सभी देवताओं ने उस दौरान ऊपर से अमृत बरसाया था। इसी के चलते शरद पूर्णिमा के दिन झिझिया बुंदेलखंड में जगह-जगह अलग नामो से जाना जाता है। कहीं टेसू,जल विहार, कहीं शरद पूर्णिमा के नाम से इसको मनाया जाता है।
पवई गांव के देवस्थान शिव भंगुर बाबा गुदरिया दाई की शादी के रूप में शरद पूर्णिमा का त्योहार बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है। इसमें पवई के बड़े तालाब में कंस वध सेना,आघासुर, बकासुर,पूतना,शेषनाग बध सहित कृष्ण लीला के पूरे स्वरुप कु झांकिया तालाब में निकाली जाती है। रात में पूरे गांव में प्रत्येक घर में धार्मिक बुंदेली विधाओं,भारतीय संस्कृति पर आधारित,कार्यक्रम रामलीला, लंका दहन, सूप नखा आयोजित किए जाते हैं।
बुंदेलखंड में सभी गांव में यह पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग दूर दूर से आते हैं। आस्था को देखते हुए शासन-प्रशासन ने भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम कर लिए हैं। जब तक ये मेला समाप्त नही हो जाता पुलिस प्रशासन राहत की साँस नही ले पाता है।
Updated on:
06 Oct 2017 04:49 pm
Published on:
06 Oct 2017 04:46 pm
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