
यूपी पुलिस ट्रांसफर पॉलिसी में बड़ा बदलाव, 2019 बाद भर्ती सिपाही-दरोगा को तबादले से राहत (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
UP Police Transfer Policy 2026: उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत हजारों पुलिसकर्मियों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने सिपाही से लेकर सब इंस्पेक्टर स्तर तक के पुलिसकर्मियों के तबादलों को लेकर नई ट्रांसफर पॉलिसी लागू कर दी है। इस संबंध में एक विस्तृत सर्कुलर जारी किया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि 2019 के बाद भर्ती हुए पुलिसकर्मियों के तबादले सामान्य परिस्थितियों में नहीं किए जाएंगे। केवल विशेष परिस्थितियों में ही स्थानांतरण पर विचार किया जाएगा। इस फैसले को पुलिस विभाग में स्थिरता, कार्यक्षमता और पारिवारिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
डीजीपी द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, वर्ष 2019 के बाद भर्ती हुए सिपाही, मुख्य आरक्षी और सब इंस्पेक्टर का सामान्य तबादला नहीं किया जाएगा। किसी भी तरह के स्थानांतरण का फैसला अब पुलिस स्थापना बोर्ड (PEB) द्वारा लिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तबादलों में पारदर्शिता बनी रहे और अनावश्यक हस्तक्षेप से बचा जा सके। हालांकि, प्रशासनिक आवश्यकता, अनुशासनात्मक कार्रवाई या अन्य विशेष परिस्थितियों में ही ट्रांसफर संभव होगा, लेकिन इसके लिए भी बोर्ड की मंजूरी अनिवार्य होगी।
नई नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 2019 से पहले भर्ती हुए पुलिसकर्मियों के तबादले पूर्व निर्धारित नियमों के तहत किए जा सकेंगे। यानी पुराने बैच के पुलिसकर्मियों के लिए तबादला प्रक्रिया पहले की तरह लागू रहेगी। डीजीपी कार्यालय के अनुसार, यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि वरिष्ठता, अनुभव और प्रशासनिक संतुलन को बनाए रखा जा सके।
नई ट्रांसफर पॉलिसी में एक बार फिर इस नियम को दोहराया गया है कि कोई भी इंस्पेक्टर या सब इंस्पेक्टर अपने गृह रेंज, गृह जनपद या गृह जनपद के सीमावर्ती जिले में तैनात नहीं किया जाएगा। इसी प्रकार मुख्य आरक्षी और आरक्षी की पोस्टिंग भी उनके गृह जिले या गृह जिले के सीमावर्ती जिले में नहीं की जाएगी। यह नियम पहले से लागू 22 जून 2018 की ट्रांसफर पॉलिसी के तहत जारी रहेगा। इसका उद्देश्य पुलिसिंग में निष्पक्षता बनाए रखना और स्थानीय प्रभाव से बचाव करना है।
नई ट्रांसफर पॉलिसी में पति-पत्नी दोनों के पुलिस विभाग में होने की स्थिति को विशेष महत्व दिया गया है। डीजीपी के अनुसार, 2019 बैच के बाद केवल उन्हीं पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर किया जाएगा, जिनमें पति और पत्नी दोनों पुलिस सेवा में कार्यरत हों। सरकार का मानना है कि पति-पत्नी की अलग-अलग जिलों में तैनाती से उन्हें पारिवारिक, मानसिक और व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए शासन की तबादला नीति के अनुरूप दंपती को एक ही जिले में तैनाती देने की व्यवस्था की गई है।
योगी आदित्यनाथ सरकार पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि जहां संभव हो, वहां पति-पत्नी को एक ही जिले में तैनात किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ेगा और वे अधिक मन लगाकर अपनी ड्यूटी निभा सकेंगे। इसी क्रम में 22 मई 2025 को पहले चरण में 101 सिपाहियों के तबादले किए गए थे। इनमें महिला पुलिसकर्मियों को उनके पति की तैनाती वाले जिले में और पुरुष पुलिसकर्मियों को उनकी पत्नी की तैनाती वाले जिले में भेजा गया था। यह पहली बार था जब इतनी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के तबादले केवल पति-पत्नी नीति के आधार पर किए गए।
इससे पहले भी अनुकंपा या विशेष परिस्थितियों में पति-पत्नी को एक ही जिले में तैनाती दी जाती थी, लेकिन ऐसे मामलों की संख्या काफी कम होती थी। नई नीति में इसे अधिक व्यवस्थित और व्यापक रूप दिया गया है। पुलिस विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस बदलाव से खासकर महिला पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले भी यूपी पुलिस की ट्रांसफर पॉलिसी में बदलाव किया गया था। उस समय यह निर्णय लिया गया था कि जिन पुलिसकर्मियों की एक जिले में 3 साल की तैनाती पूरी हो चुकी है, या फिर 31 मई 2024 तक 3 वर्ष पूरे हो गए हैं, उनका तबादला किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करना और एक ही स्थान पर लंबे समय से तैनात अधिकारियों को बदलना था।
विशेषज्ञों के अनुसार, नई ट्रांसफर पॉलिसी से पुलिस विभाग में स्थिरता आएगी। बार-बार तबादले न होने से पुलिसकर्मी अपने क्षेत्र को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे और अपराध नियंत्रण में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे। साथ ही, ट्रांसफर का निर्णय पुलिस स्थापना बोर्ड के हाथ में होने से मनमानी और राजनीतिक हस्तक्षेप की संभावना भी कम होगी।
नई नीति को लेकर पुलिसकर्मियों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां 2019 के बाद भर्ती हुए पुलिसकर्मियों ने इसे राहत भरा फैसला बताया है, वहीं कुछ वरिष्ठ पुलिसकर्मियों का कहना है कि प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लचीलापन भी जरूरी है।
Updated on:
16 Jan 2026 06:04 pm
Published on:
16 Jan 2026 05:58 pm
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