
गठन के बाद हुए प्रथम सत्र तथा प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के शुरुआत में राज्यपाल विधान मण्डल के एक साथ दोनों सदनों को सम्बोधित करते हैं। अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव सदस्य खुद में से करते हैं।
यूपी विधानसभा यानी भारत के सबसे अधिक सदस्यों वाली विधायिका। आजादी के बाद पहली विधानसभा साल 1952 में गठित हुई थी। अब तक कुल 18 बार विधानसभा का गठन हो चुका है।
उत्तर प्रदेश राज्य विधान परिषद और विधान सभा दो सदन वाली विधायिका है। उत्तर प्रदेश राज्य विधान मण्डल भारत की सबसे बड़ी विधायिका है। उत्तर प्रदेश विधान सभा दो सदनों वाले विधान मण्डल का निचला सदन है जिसमें 403 निर्वाचित सदस्य होते हैं।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद में कुल 100 सदस्य हैं। वर्ष 1967 तक एक एंग्लो इंडियन मेंबर को शामिल करते हुए विधान सभा के कुल सदस्यों की संख्या 431 थी। साल 1967 के बाद विधान सभा की कुल सदस्य संख्या 426 हो गई।
9 नवम्बर, 2000 को यूपी राज्य के पुनर्गठन एवं उत्तराखण्ड के गठन के बाद विधान सभा की सदस्य संख्या 403 निर्वाचित और एक एंग्लो इंडियन मेंबर के मनोनीत सदस्य को शामिल करते हुए 404 हो गई।
25 जनवरी, 2020 को लागू हुए संविधान यानी 104वें संशोधन अधिनियम, 2019 के बाद एक एंग्लो इंडियन सदस्य को नामित करने का प्रावधान को खत्म कर दिया गया।
विधान सभा का कार्यकाल कुल 5 वर्ष का होता है यदि वह इसके पूर्व विघटित न हो गई हो। प्रथम विधान सभा का गठन 1952 को हुआ था। तब से इसका 18 बार गठन हो चुका है। वर्तमान विधान सभा का गठन 11 मार्च, 2022 को हुआ।
गठन के बाद हुए प्रथम सत्र तथा प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के शुरुआत में राज्यपाल विधान मण्डल के एक साथ दोनों सदनों को सम्बोधित करते हैं। अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव सदस्य खुद में से करते हैं।
अधिकतर यही परंपरा रही है कि जो सबसे वरिष्ठ सदस्य है विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए उसी का चुनाव किया जाता है। उत्तर प्रदेश विधान सभा एवं विधान परिषद के सदन का हिस्टोरिकल भवन लखनऊ में है।
योगी आदित्यनाथ 19 मार्च, 2017 से लगातार दूसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं नेता सदन हैं। सतीश महाना 29 मार्च, 2022 से विधानसभा अध्यक्ष हैं। 26 मार्च, 2022 से अखिलेश यादव नेता, विरोधी दल हैं।
काउन्सिंल हाउस यानी विधान भवन के भव्य बिल्डिंग की नींव 15 दिसम्बर, 1922 को तत्कालीन गवर्नर सर स्पेंसर हरकोर्ट बटलर द्वारा रखी गयी थी तथा 21 फरवरी, 1928 को इसका उद्घाटन हुआ था।
इस भवन का निर्माण कलकत्ता की कम्पनी मेसर्स मार्टिन एण्ड कम्पनी ने किया था। इसके मुख्य आर्कीटेक्ट सर स्विनोन जैकब और श्री हीरा सिंह थे। उस समय इसके बनने में कुल 21 लाख रुपए सैंक्शन हुआ था।
मिर्जापुर के पत्थरों से बना है विधान भवन, रोमन शैली में लगी हैं पत्थर की मूर्तियां
इस भवन का आर्किटेक यूरोपियन और अवधी निर्माण की मिश्रित शैली का बेस्ट एग्जांपल है। यह भवन अर्धचक्राकार रूप में मुख्य रूप से दो मंजिलों में मिर्जापुर में मौजूद चुनार के भूरे रंग के बलुआ पत्थरों के ब्लाक से निर्मित है। अर्धचक्र के बीच में 'गोथिक' शैली का गुम्बद है जिसके शीर्ष पर एक आकर्षक छतरी है।
इस गुम्बद के चारों ओर सजावट के रूप में ‘रोमन’ शैली में बड़े आकार की पत्थर की मूर्तियां बनी हुयी हैं। भवन के बाहरी भाग के पोर्टिको के ऊपर संगमरमर से प्रदेश का राज्य चिन्ह बना हुआ है। बिल्डिंग के कमरों और हॉल की फ्लोरिंग के लिए आगरा और जयपुर से मार्बल लाया गया।
भवन के अन्दर अनेक हाल एवं दीर्घायें हैं जो मुख्यत: आगरा और जयपुर के संगमरमर से बनी है। ऊपरी मंजिल तक जाने के लिए मुख्य द्वार के दाहिने एवं बायी ओर अत्यन्त सुन्दर शैली में संगमरमर निर्मित गोलाकार सीढ़िया बनी हैं। इन सीढ़ियों की दीवारों पर विशिष्ट प्रकार की पेन्टिंग बाद में करायी गयी है।
गुम्बद के नीचे अष्टकोणीय चेम्बर अर्थात मुख्य हाल बना है। इसकी वास्तुकला अत्यन्त ही आकर्षक पच्चीकारी शैली में है। हाल की गुम्बदीय आकार की छत में जालियां तथा नृत्य करते हुए आठ मोरों की अत्यन्त सुन्दर आकृतियां बनी है। इसी चेम्बर में विधान सभा की बैठकें होती है। माननीय सदस्यों के लिए चेम्बर के दोनों तरफ एक-एक बड़ी लाबी है।
विधान परिषद् की बैठकों एवं कार्यालय कक्षों के लिए एक अलग चेम्बर का प्रस्ताव जुलाई, 1935 में हुआ। जिसके निर्माण का कार्य मैसर्स फोर्ड एण्ड मैक्डानल्ड को सौंपा गया। मुख्य आर्किटेक्ट ए० एम० मार्टीमंर द्वारा एक्सटेंशन भवन का निर्माण कराया गया जो लोक निर्माण विभाग की देखरेख में नवम्बर, 1937 में पूर्ण हुआ। विधान परिषद् का यह भवन मुख्य भवन के दोनों ओर बनाए गए कमरों व बरामदों से जुड़ा हुआ है।
Updated on:
24 Feb 2023 10:09 am
Published on:
24 Feb 2023 09:53 am
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